
Sankashti Chaturthi 2026: आध्यात्मिक शांति और सिद्धि की प्राप्ति हेतु भगवान गणेश की आराधना का विशेष पर्व संकष्टी चतुर्थी भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पावन दिवस भगवान विघ्नहर्ता गणेश को समर्पित है, जब श्रद्धालु विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना कर जीवन के समस्त विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व कब मनाया जाएगा और क्या है इसकी महिमा।
Sankashti Chaturthi 2026: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें विघ्नहर्ता गणेश की पूजा
गणेश जी की कृपा प्राप्त करने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन भक्तगण श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हैं और संध्याकाल में चंद्रमा के दर्शन के पश्चात व्रत का पारण करते हैं। यह माना जाता है कि इस दिन की गई गणेश पूजा से व्यक्ति को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Sankashti Chaturthi 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व 12 फरवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह चतुर्थी भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप को समर्पित है, जिनकी आराधना से दो जन्मों के पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, रात्रि 09 बजकर 33 मिनट से
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, शाम 06 बजकर 14 मिनट तक
- चंद्रोदय समय: 12 फरवरी 2026, रात्रि 09 बजकर 47 मिनट पर
यह तिथियां और मुहूर्त ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर निर्धारित किए गए हैं, जो आपके व्रत और पूजा के लिए अत्यंत शुभ हैं।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की आराधना विशेष फलदायी होती है। इस दिन की जाने वाली गणेश पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
- प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें।
- भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- गणेश जी को जल, अक्षत, रोली, चंदन, फूल, दूर्वा घास (21 गांठ), मोदक या लड्डू अर्पित करें।
- धूप-दीप प्रज्ज्वलित करें और भगवान गणेश के समक्ष अपनी मनोकामना कहें।
- संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।
- रात्रि में चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को अर्घ्य दें।
- अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।
मंत्र और महिमा
संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के मंत्रों का जाप विशेष रूप से लाभकारी होता है। यह मंत्र मन को शांत करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं।
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
यह पर्व विशेष रूप से कष्टों को हरने वाला माना जाता है। द्विजप्रिय स्वरूप की उपासना से ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धाभाव से की गई पूजा और व्रत से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में खुशहाली आती है।
उपसंहार
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का यह पावन पर्व भगवान गणेश के प्रति हमारी अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना निश्चित रूप से आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाएगी।
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