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फ़रवरी, 11, 2026
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Saphala Ekadashi: सफला एकादशी व्रत 2025: जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करें

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Saphala Ekadashi: पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है, जो जीवन में सफलता, सुख और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। यह पावन तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन विधि-विधान से किए गए पूजन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सफला एकादशी का व्रत समस्त संकटों का नाश कर जीवन को आनंद और समृद्धि से भर देता है। इस दिन श्री हरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। आइए, इस शुभ एकादशी के आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि पर विस्तार से प्रकाश डालें।

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Saphala Ekadashi: सफला एकादशी व्रत 2025: जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करें

सफला एकादशी 2025: पूजा विधि और महत्व

शास्त्रों के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और निष्ठा से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत व्यक्ति को मोह-माया और पापों से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। इस पवित्र दिन पर किया गया दान-पुण्य और भजन-कीर्तन अक्षय फल प्रदान करता है। सफला एकादशी का धार्मिक महत्व यह है कि यह एकादशी भगवान को प्रिय है, और इसके पालन से दरिद्रता का नाश होता है।

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सफला एकादशी की पूजा विधि

सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए इन नियमों का पालन करें:

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  • एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • अपने घर के पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र, तुलसी दल, फल, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।
  • खीर, पंचामृत या अन्य सात्विक नैवेद्य भगवान को भोग लगाएं।
  • सफला एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • अंत में, आरती करें और परिवार के सदस्यों तथा अन्य भक्तों में प्रसाद वितरित करें।
  • अगले दिन, यानी द्वादशी को, ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर व्रत का पारण करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह भी पढ़ें:  विजया एकादशी 2026: जानिए व्रत के नियम और महत्व

शुभ मुहूर्त और पारण का समय

पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी मनाई जाती है। चूंकि मूल सामग्री में विशिष्ट शुभ मुहूर्त का उल्लेख नहीं है, भक्तों को सफला एकादशी 2025 के लिए सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग या किसी विद्वान पंडित से परामर्श करना चाहिए। यह आवश्यक है कि पूजा और पारण का समय शास्त्रोक्त विधि से ही निर्धारित हो ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

भगवान विष्णु का मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

निष्कर्ष और उपवास

सफला एकादशी का व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का एक सशक्त माध्यम है। इस दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं और उसे जीवन में अपार सफलता प्राप्त होती है। इस पवित्र दिन पर सात्विक आहार ग्रहण करें, मन को शांत रखें और परोपकार के कार्य करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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