



Saphala Ekadashi 2025: हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत मोक्षदायिनी और अत्यंत फलदायी माना गया है, और वर्ष 2025 में सफला एकादशी 15 दिसंबर को पड़ेगी।
सफला एकादशी 2025: व्रत नियम, पूजा विधि और महत्व
शांत और निर्मल मन से इस पावन अवसर पर भगवान नारायण की आराधना करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह एकादशी भक्तों के लिए सौभाग्य और समृद्धि का द्वार खोलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए विस्तार से जानते हैं सफला एकादशी के व्रत नियम और इसके महत्व को।
सफला एकादशी 2025: व्रत का महात्म्य और फल
पुराणों के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अपने सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और उसके पापों का नाश होता है। इस दिन भगवान नारायण की विधि-विधान से पूजा अर्चना करने से उनका आशीर्वाद सदा भक्तों पर बना रहता है। यह एकादशी व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
सफला एकादशी की पूजा विधि
सफला एकादशी के दिन भक्त कुछ विशेष नियमों का पालन करते हुए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
- भगवान को चंदन, अक्षत, तुलसी दल, फल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान का ध्यान करें।
- पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर व्रत का पालन करें।
- रात में जागरण कर भगवान के भजन कीर्तन करें।
- अगले दिन (द्वादशी तिथि) शुभ मुहूर्त में ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दें और फिर स्वयं पारण करें।
सफला एकादशी के नियम और महत्व
सफला एकादशी व्रत के कुछ विशेष नियम हैं जिनका पालन करना आवश्यक है। इस दिन अन्न का सेवन वर्जित होता है। भक्तों को क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का त्याग करना चाहिए। भगवान नारायण के प्रति पूर्ण समर्पण भाव से यह एकादशी व्रत किया जाता है। माना जाता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। यह दिन उन सभी भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है जो अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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सफला एकादशी का आध्यात्मिक संदेश
सफला एकादशी हमें जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए शुद्ध मन, निष्ठा और समर्पण के महत्व को सिखाती है। यह एकादशी व्रत आत्म-संयम और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का एक माध्यम है, जो हमें आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायता करता है। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
निष्कर्ष:
सफला एकादशी 15 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी, यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर है। इस दिन व्रत और पूजा के नियमों का पालन करने से व्यक्ति को जीवन में हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाने के लिए इस पावन एकादशी पर भगवान नारायण का स्मरण करें और उनकी स्तुति करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


