



Saphala Ekadashi: यह पावन पर्व भगवान विष्णु को समर्पित है, जो भक्तों को सुख-समृद्धि और मोक्ष प्रदान करता है। इस पवित्र तिथि पर भगवान नारायण की आराधना से सभी कार्य सफल होते हैं और जीवन में आने वाली हर बाधा दूर होती है।
Saphala Ekadashi 2025: सफला एकादशी पर करें भगवान विष्णु की आरती, मिलेगी हर कार्य में सफलता
पौष मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। यह एकादशी अपने नाम के अनुरूप ही फलदायी है, जो भक्तों को मोक्ष और वैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन पूरे विधि-विधान से एकादशी व्रत का पालन करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।
Saphala Ekadashi का महत्व और पूजा विधि
सफला एकादशी का व्रत समस्त व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान श्रीहरि की उपासना करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ और भगवान विष्णु की आरती करना विशेष रूप से फलदायी होता है।
सफला एकादशी 2025: शुभ मुहूर्त
सफला एकादशी का पावन पर्व गुरुवार, 26 दिसंबर 2025 को मनाया जाएगा।
नीचे दी गई तालिका में सफला एकादशी के शुभ मुहूर्त विस्तार से दिए गए हैं:
| विवरण | समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 25 दिसंबर 2025, शाम 07:34 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 26 दिसंबर 2025, रात 09:47 बजे |
| पारण का समय | 27 दिसंबर 2025, सुबह 07:13 बजे से 09:18 बजे तक |
भगवान विष्णु की पूजा विधि
सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा निम्नलिखित विधि से करनी चाहिए:
- प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को पीले वस्त्र, पीले फूल, चंदन, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- सफला एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें।
- अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
सफला एकादशी कथा
प्राचीन काल में चंपावती नगरी में महिष्मन नाम का एक राजा राज्य करता था। उसका पुत्र लुम्पक अत्यंत पापी और दुराचारी था। राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। लुम्पक वन में रहने लगा और चोरी करके अपना जीवन यापन करने लगा। एक बार पौष मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को वह बहुत बीमार पड़ गया और ठंड से कांपते हुए एक पीपल के पेड़ के नीचे सो गया। अगली सुबह सूर्योदय होने से पहले ही उसने एक पत्थर से पीपल के फल तोड़े, लेकिन उस दिन एकादशी होने के कारण उसे अनजाने में सफला एकादशी का व्रत हो गया। रात भर ठंड में जागने और अनजाने में किए गए एकादशी व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उसके सभी पाप नष्ट हो गए। लुम्पक को फिर से राज्य मिला और वह धर्मपरायण होकर जीवन जीने लगा।
भगवान विष्णु का मूल मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
श्री विष्णु जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनशे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे…मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे…तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे…तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे…तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे…दीन बन्धु दुःख हरता, तुम रक्षक मेरे।
करुणा हस्त बढ़ाओ, करुणा हस्त बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे…विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे…ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
इस प्रकार सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और आरती करने से मनुष्य के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सभी भक्तों को इस पावन पर्व का लाभ अवश्य उठाना चाहिए।

