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फ़रवरी, 11, 2026
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सफला एकादशी व्रत कथा: जानें इसका अद्भुत धार्मिक महत्व

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Saphala Ekadashi: पौष मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली सफला एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस पावन दिवस पर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला होता है। इस वर्ष 15 दिसंबर 2025 को यह विशेष एकादशी मनाई जा रही है।

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सफला एकादशी व्रत कथा: जानें इसका अद्भुत धार्मिक महत्व

सफला एकादशी: व्रत का महत्व और पूजन विधि

धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति सफला एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक करता है, उसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और वह बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। पुराणों में वर्णित है कि जो कोई भी इस व्रत की कथा का श्रवण या पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एकादशी सभी व्रतों में श्रेष्ठ मानी गई है, क्योंकि यह नाम के अनुसार ही ‘सफलता’ प्रदान करती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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सफला एकादशी व्रत कथा का महात्म्य

राजा महिष्मत और राजकुमार लुम्पक की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, चम्पावती नामक एक नगरी में राजा महिष्मत राज्य करते थे। उनके पाँच पुत्र थे, जिनमें सबसे बड़ा पुत्र लुम्पक महापापी और दुराचारी था। वह हमेशा गलत कार्यों में लिप्त रहता था, जिससे राजा और परिवार के सभी सदस्य उससे दुखी थे। थक हार कर राजा ने उसे राज्य से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में जाकर रहने लगा और चोरी-डकैती करके अपना जीवन व्यतीत करने लगा। एक बार पौष मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को वह बहुत बीमार पड़ गया। अत्यधिक ठंड और भूख के कारण वह बहुत कमजोर हो गया।

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यह भी पढ़ें:  Mahashivratri Vrat: उपवास के नियम और शुभ आहार

एकादशी के दिन वह पीपल के वृक्ष के नीचे पड़ा रहा। उस दिन उसे भोजन नहीं मिला और वह पूरी रात जागता रहा। पीपल के पेड़ के नीचे कई छोटे-छोटे पत्थर रखे थे, जिन्हें वह देवता समझकर प्रणाम करता रहा। रात्रि जागरण और अनजाने में किए गए उपवास से उसे सफला एकादशी के व्रत का पुण्य प्राप्त हो गया। सूर्योदय होते ही लुम्पक की चेतना जागी और उसने देखा कि उसके सामने दिव्य वस्त्र और आभूषण रखे हैं। एक आकाशवाणी हुई, ‘हे राजकुमार! सफला एकादशी के पुण्य से तुम्हारे सारे पाप नष्ट हो गए हैं। अब तुम अपने पिता के पास जाकर राजपाट संभालो।’ यह सुनकर लुम्पक को अपनी गलतियों का एहसास हुआ और वह तुरंत अपने पिता के पास लौट आया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राजा महिष्मत ने उसे क्षमा कर दिया और अपना राजपाट सौंप दिया। लुम्पक ने धर्मपूर्वक राज्य किया और अंत में मोक्ष को प्राप्त हुआ। इस प्रकार सफला एकादशी का व्रत अनजाने में भी किए जाने पर मोक्ष प्रदान करता है।

इस पावन दिवस पर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए इस मंत्र का जाप करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

सफला एकादशी का व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा और भक्ति से इस व्रत को रखता है और कथा का श्रवण करता है, उसे जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं और वस्त्र दान करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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