
Shadi Muhurat 2026: इंतजार की घड़ियां अब लद गईं और शुभ कार्यों पर लगा ताला आखिरकार खुल गया है। सूर्य देव के उत्तरायण होते ही खरमास का अध्याय समाप्त हो चुका है और अब एक बार फिर शहनाइयों की गूंज फिजाओं में घुलने को तैयार है।
खरमास खत्म, मांगलिक कार्यों का श्रीगणेश
हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान सूर्य के उत्तरायण होते ही खरमास की अवधि समाप्त हो जाती है। पिछले एक महीने से विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर जो विराम लगा हुआ था, वह अब हट चुका है। ज्योतिषविदों के अनुसार, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही शुभ कार्यों का रास्ता खुल गया है। इस वर्ष का पहला शुभ विवाह मुहूर्त माघ शुक्ल एकादशी, यानी आज गुरुवार से ही बन रहा है, जिसके साथ ही शादी-विवाह का औपचारिक सिलसिला शुरू हो जाएगा।
हालांकि, इस साल विवाह की शुरुआत थोड़ी देर से हुई है, जिसका मुख्य कारण शुक्र ग्रह का अस्त होना बताया जा रहा है। इसी वजह से शुरुआती दिनों में सीमित मुहूर्त ही उपलब्ध थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब प्रतिबंध हटने से उन परिवारों ने राहत की सांस ली है जो लंबे समय से शुभ लग्न का इंतजार कर रहे थे।
Shadi Muhurat 2026 की पूरी लिस्ट: फरवरी और जुलाई सबसे खास
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में विवाह के लिए सबसे अनुकूल महीना फरवरी का माना जा रहा है। इस महीने में सबसे अधिक शुभ लग्न उपलब्ध हैं। 4 फरवरी से लेकर 26 फरवरी तक लगातार विवाह के उत्तम योग बन रहे हैं। यही वजह है कि मैरिज हॉल, बैंड-बाजा और कैटरिंग से जुड़े कारोबारियों के लिए यह महीना बेहद व्यस्त रहने वाला है। कई परिवारों ने पहले से ही फरवरी में शादियों की तैयारी पूरी कर ली है।
फरवरी के बाद जुलाई के महीने में भी विवाह के लिए छह शुभ मुहूर्त मिलेंगे। इसके बाद लंबा इंतजार करना पड़ेगा और चातुर्मास समाप्त होने पर नवंबर में चार और दिसंबर में सात शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध होंगे। इस तरह साल के आखिरी दो महीने भी शादियों की रौनक से गुलजार रहेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां यहां क्लिक करें।
इन महीनों में नहीं बजेगी शहनाई
इस साल मांगलिक कार्यों में कई बार लंबा विराम भी लगेगा। 14 मार्च से 14 अप्रैल तक साल का दूसरा खरमास लगेगा, जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। इसके अलावा, साल 2026 धार्मिक दृष्टि से भी विशेष है क्योंकि इसमें अधिक मास का संयोग बन रहा है, जिससे यह साल 12 की जगह 13 महीनों का होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ज्येष्ठ मास दो बार आएगा।
अधिक मास के दौरान 15 मई से 17 जून तक मलमास रहेगा, जिसमें विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसके बाद 25 जुलाई से 20 नवंबर तक चातुर्मास की अवधि रहेगी। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, इसलिए इन चार महीनों में भी शादियों पर विराम लगा रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कुल मिलाकर, साल 2026 में विवाह के लिए सीमित लेकिन महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे, जिसे लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।





