



Shani Pradosh Vrat: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला शनि प्रदोष व्रत, जब शनिवार के दिन आता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में, यह पावन व्रत 14 फरवरी, वैलेंटाइन डे के दिन पड़ रहा है, जो प्रेम और भक्ति का एक अद्भुत संगम बना रहा है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और स्थिरता आती है, साथ ही अविवाहितों को भी मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक ऐसा दुर्लभ संयोग है जब लौकिक प्रेम का उत्सव आध्यात्मिक भक्ति के साथ एकाकार हो जाता है।
प्रेम और सद्भाव का संगम: वैलेंटाइन डे पर Shani Pradosh Vrat का महासंयोग
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और शनिवार को पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से शिव पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इस वर्ष का यह अद्भुत योग उन सभी के लिए विशेष है जो अपने रिश्तों में मधुरता, विश्वास और अटूट प्रेम चाहते हैं।
Shani Pradosh Vrat की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और शनिदेव दोनों की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
पूजा विधि:
- शाम के समय (प्रदोष काल में) शिव मंदिर में जाएं या घर पर ही पूजा की तैयारी करें।
- भगवान शिव का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें।
- उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, अक्षत, पुष्प और मिठाई अर्पित करें।
- मां पार्वती और नंदी महाराज की भी पूजा करें।
- शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि चालीसा का पाठ करें और काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल अर्पित करें।
- शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
- आरती कर सभी को प्रसाद वितरित करें।
- आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी होता है।
शनि प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त:
| तिथि | प्रारंभ | समाप्त | पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल) |
|---|---|---|---|
| 14 फरवरी 2026, शनिवार (त्रयोदशी तिथि) | 14 फरवरी 2026, शाम 04:30 बजे | 15 फरवरी 2026, शाम 04:00 बजे | 14 फरवरी 2026, शाम 05:45 बजे से रात 08:21 बजे तक |
महत्व और कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है और शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत संतान सुख और दांपत्य जीवन की खुशियों के लिए विशेष फलदायी है। जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करते हैं, उन्हें महादेव और शनिदेव दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन शिव पूजा के साथ-साथ शनिदेव का स्मरण और उन्हें समर्पित उपाय करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
उपाय और लाभ:
जो जोड़े अपने रिश्तों में प्यार, विश्वास और स्थिरता बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करनी चाहिए। इस दिन शिव मंदिर में दीया जलाना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के नीचे जलाना और गरीब व जरूरतमंद लोगों को दान करना भी बहुत पुण्यकारी होता है। यह दिन उन सभी प्रेमियों और दंपतियों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो अपने रिश्ते को देवत्व और पवित्रता के बंधन से बांधना चाहते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत न केवल भौतिक सुख प्रदान करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
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