
Sheetla Ashtami 2026: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व आरोग्यता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह दिन माता शीतला को समर्पित है, जिनकी आराधना से सभी प्रकार के शीतलता संबंधी रोग दूर होते हैं और जीवन में शांति का संचार होता है। इस पवित्र दिवस पर कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है, वहीं कुछ कार्यों से बचना हितकर माना गया है। आइए, जानते हैं शीतला अष्टमी के शुभ विधान और वर्जित कार्यों के बारे में।
Sheetla Ashtami 2026: शीतला माता की आराधना और आरोग्य का पर्व
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर, भक्तगण निरोगी जीवन और परिवार के कल्याण की कामना से माता शीतला की उपासना करते हैं। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और स्वच्छता का संदेश भी देता है। हमें इस दिन की पूजा विधि और उसके नियमों का गहनता से पालन करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। माता शीतला की कृपा प्राप्त करने और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए, इस पावन अवसर पर माता शीतला की पूजा विधि को पूर्ण श्रद्धा से अपनाना चाहिए।
Sheetla Ashtami 2026 के दिन क्या करें और क्या न करें
यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि शीतला अष्टमी के दिन कौन से कार्य शुभ माने जाते हैं और किन कार्यों से बचना चाहिए, ताकि माता की प्रसन्नता बनी रहे। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
शीतला अष्टमी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि (संभावित)
| विवरण | समय/तिथि |
|---|---|
| शीतला अष्टमी तिथि | चैत्र मास, कृष्ण पक्ष की अष्टमी |
| तिथि प्रारंभ (संभावित) | 14 मार्च 2026, शुक्रवार, सुबह 08:30 बजे |
| तिथि समाप्त (संभावित) | 15 मार्च 2026, शनिवार, सुबह 06:15 बजे |
| पूजा का शुभ मुहूर्त (संभावित) | सुबह 06:20 बजे से अगले दिन सुबह 06:15 बजे तक |
शीतला अष्टमी के शुभ कार्य: क्या करें
- प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा के लिए एक दिन पहले बनाया गया बासी भोजन (जैसे पूड़ी, दही-भात, गुलगुले) और ठंडी चीजें तैयार रखें।
- माता शीतला की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें और धूप-दीप प्रज्वलित करें।
- माता को हल्दी, रोली, चंदन, अक्षत, वस्त्र, मेंहदी और अन्य श्रंगार सामग्री अर्पित करें।
- नीम के पत्तों से माता की पूजा करें, क्योंकि नीम को शीतला माता का स्वरूप माना जाता है।
- जल कलश में नीम के पत्ते डालकर रखें और माता को जल अर्पित करें।
- शीतला स्तोत्र का पाठ करें और माता के मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के उपरांत बासी भोजन का भोग लगाएं और इसे प्रसाद स्वरूप स्वयं ग्रहण करें तथा परिवार में वितरित करें।
शीतला अष्टमी पर इन कार्यों से बचें:
- इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है, न ही ताजा भोजन पकाया जाता है। एक दिन पहले ही भोजन बना लिया जाता है।
- गर्म पानी से स्नान करने से बचें। शीतल जल से ही स्नान करें।
- किसी भी धारदार वस्तु, जैसे कैंची, चाकू, सुई आदि का प्रयोग न करें।
- बाल धोना या नाखून काटना इस दिन वर्जित माना गया है।
- घर में साफ-सफाई (झाड़ू लगाना, पोछा लगाना) नहीं करनी चाहिए।
- इस दिन किसी भी प्रकार के गर्म या तले हुए भोजन का सेवन न करें।
शीतला माता की महिमा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, माता शीतला रोगों, विशेषकर चेचक, खसरा आदि जैसी बीमारियों से मुक्ति प्रदान करती हैं। इनकी आराधना से व्यक्ति को निरोगी काया और सुखमय जीवन प्राप्त होता है। माता शीतला गधे की सवारी करती हैं और हाथ में झाड़ू व कलश धारण करती हैं, जो स्वच्छता और शीतलता का प्रतीक है। उनकी कृपा से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको धर्म और आध्यात्म की सही जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
माता शीतला का मंत्र
यह पवित्र मंत्र माता शीतला को समर्पित है, जिसका जाप करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है:
वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृत मस्तकाम्॥
निष्कर्ष और उपाय
शीतला अष्टमी का पर्व हमें संयम, स्वच्छता और प्रकृति के प्रति सम्मान का पाठ पढ़ाता है। इस दिन सच्चे मन से माता की आराधना करने से न केवल शारीरिक कष्ट दूर होते हैं, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। यदि संभव हो तो गरीब और जरूरतमंदों को बासी भोजन या शीतल जल का दान करें। ऐसा करने से माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आरोग्यता का वरदान देती हैं। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है, और इसकी रक्षा के लिए हमें सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए।



