
Surya Dev Aarti: ब्रह्मांड में ऊर्जा और प्रकाश का संचार करने वाले भगवान सूर्यदेव की आराधना भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, और रविवार का पावन दिवस प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य को समर्पित है।
सूर्य देव आरती: रविवार को क्यों है सूर्यदेव की आरती का विशेष महत्व?
सूर्य देव को नवग्रहों का राजा माना जाता है, और उनकी कृपा से व्यक्ति को यश, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। रविवार के दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा का समापन यदि आरती से किया जाए, तो यह अत्यंत फलदायी होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह माना जाता है कि नियमित रूप से सूर्यदेव की आराधना करने से न केवल शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मबल में भी वृद्धि होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हो, उन्हें रविवार को सूर्यदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए।
रविवार को सूर्य देव आरती करने के लाभ और विधि
सूर्यदेव की आरती करना वस्तुतः उनके प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का सर्वोत्तम माध्यम है। यह पूजा को पूर्णता प्रदान करता है और भक्त को भगवान सूर्य के दिव्य तेज से जोड़ता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। सूर्य देव की पूजा विधि: रविवार के दिन सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत हो जाएं। तत्पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर एक तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान सूर्य को प्रणाम करें और उनकी आरती करें।
सूर्य देव की पूजा विधि
- प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ लाल वस्त्र धारण करें।
- तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- अंत में पूरी श्रद्धा से सूर्यदेव की आरती करें।
सूर्यदेव की आरती
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।सारथी अरुण तुम्हारा, श्वेत कमल है प्यारा।
चार अश्व हैं मन भावन, प्रभु तुम हो जग पावन।
देव सब करें सम्मान, ॐ जय सूर्य भगवान।।तुम हो एक देव स्वामी, त्रिभुवन के अंतर्यामी।
सब सुख देते हो तुम ही, मन के जाने तुम ही।
अतिशय है करुणावान, ॐ जय सूर्य भगवान।।करुणाकर तुम भक्तन के, दुःख हरता हरि जन के।
सब दुख दूर करे हो, सुख संपत्ति भरे हो।
सब का जीवन वरदान, ॐ जय सूर्य भगवान।।ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
निष्कर्ष और उपाय
सूर्यदेव की आरती का नियमित पाठ करने से आत्मबल में वृद्धि होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेषकर रविवार के दिन की गई यह आरती विशेष फलदायी मानी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अपने जीवन में प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा के लिए सूर्यदेव का नित्य स्मरण करें और उनकी स्तुति गाएं।
उपाय
रविवार के दिन सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए गुड़, लाल चंदन और गेहूं का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही, प्रातःकाल सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देना और ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इन सरल उपायों से आप सूर्यदेव की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को आरोग्य, ऐश्वर्य और शांति से परिपूर्ण कर सकते हैं।





