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फ़रवरी, 16, 2026
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Surya Grahan 2026: जानें धार्मिक मान्यताएं और नियम

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Surya Grahan 2026: ज्योतिषीय गणनाओं और खगोलीय घटनाओं के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण सूर्य ग्रहण लगने वाला है। यह केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भारतीय सनातन धर्म में इसके कई गहरे आध्यात्मिक और धार्मिक निहितार्थ भी बताए गए हैं, जिनके पालन का विशेष महत्व होता है। जब सूर्य ग्रहण दृश्यमान होता है, तो उसका एक विशिष्ट धार्मिक पहलू सूतक काल भी मान्य होता है। सनातन परंपरा के अनुसार, सूतक काल में कुछ विशेष कार्यों को वर्जित माना गया है, जिसमें पूजा-पाठ और सोना प्रमुख हैं। आइए, इस दौरान इन क्रियाओं को न करने के पीछे छिपे धार्मिक और वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Surya Grahan 2026: जानें धार्मिक मान्यताएं और नियम

Surya Grahan 2026: क्या हैं सूतक काल के दौरान वर्जित कार्य?

सूर्य ग्रहण और सूतक काल की अवधारणा

ग्रहण काल को भारतीय ज्योतिष में एक अशुभ अवधि माना जाता है, जब नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस दौरान वातावरण में एक प्रकार की सूक्ष्म अशुद्धि व्याप्त होती है, जिसका प्रभाव सभी सजीव प्राणियों पर पड़ता है। इसी कारण सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मूर्ति स्पर्श भी वर्जित होता है।

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ग्रहण काल में पूजा-पाठ क्यों है वर्जित?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण काल में देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और विग्रह अपवित्र हो जाते हैं। इस अवधि में की गई पूजा फलदायी नहीं होती, बल्कि कई बार इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। इसलिए, सूतक काल आरंभ होते ही भगवान का स्मरण मानसिक रूप से ही करने की सलाह दी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मंत्र जाप करना इस अवधि में विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह मन को शांत रखता है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है। हालांकि, मंत्रों का जाप मानसिक रूप से या बिना किसी प्रतिमा के स्पर्श के ही करना चाहिए।

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ग्रहण काल में सोने की मनाही का रहस्य

ग्रहण के समय सोना स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से हानिकारक माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दौरान सोने से शरीर और मन पर ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे आलस्य, रोग और नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और वृद्धों को छोड़कर स्वस्थ व्यक्तियों को इस अवधि में सोने से बचना चाहिए।

ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय

ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए कुछ विशेष उपायों का उल्लेख किया गया है। ग्रहण के दौरान भोजन न करना, पानी न पीना, गर्भवती महिलाओं द्वारा विशेष सावधानी बरतना, और ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करना आदि महत्वपूर्ण हैं। ग्रहण के बाद दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, खासकर अनाज, वस्त्र या धन का दान करने से ग्रह-दोष शांत होते हैं।

इस प्रकार, 17 फरवरी 2026 को पड़ने वाले Surya Grahan 2026 के धार्मिक नियमों का पालन करके हम न केवल अपनी परंपराओं का निर्वाह करते हैं, बल्कि स्वयं को खगोलीय परिवर्तनों के संभावित नकारात्मक प्रभावों से भी सुरक्षित रखते हैं। यह एक अवसर है आत्मचिंतन और ईश्वरीय शक्ति पर विश्वास को सुदृढ़ करने का। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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