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फ़रवरी, 13, 2026
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Vastu Tips: रसोईघर का वास्तु सम्मत निर्माण, सुख-समृद्धि का आधार

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Vastu Tips: भारतीय संस्कृति में घर का हर कोना विशेष महत्व रखता है, और रसोईघर को तो अन्नपूर्णा का वास माना गया है, जो गृहस्थी की समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई का निर्माण और उसका सही स्थान परिवार के सदस्यों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यदि आप वास्तु के सिद्धांतों का पालन करते हुए अपनी रसोई का निर्माण करते हैं, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, खुशहाली बनी रहती है और आपसी सौहार्द भी मजबूत होता है।

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Vastu Tips: रसोईघर का वास्तु सम्मत निर्माण, सुख-समृद्धि का आधार

रसोईघर निर्माण में Vastu Tips का महत्व

प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित वास्तु शास्त्र हमें जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और सकारात्मकता लाने का मार्ग दिखाता है। गृहस्थ जीवन में रसोई का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह केंद्र है जहाँ से पूरे परिवार का पोषण होता है। गलत दिशा में बनी रसोई अनेक प्रकार की परेशानियों को न्यौता दे सकती है, जबकि सही दिशा में निर्मित रसोई घर में धन-धान्य और आरोग्य लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वास्तु के नियमों का पालन कर, आप अपने घर में सुख-शांति और समृद्धि सुनिश्चित कर सकते हैं।

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वास्तु शास्त्र के गहन सिद्धांतों के अनुसार, रसोई का स्थान अग्नि तत्व से जुड़ा है, और अग्नि की सही स्थापना ही शुभ फल प्रदान करती है। इसलिए, यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि आपके घर में रसोई बनाने के लिए कौन सी दिशा सबसे शुभ रहेगी। यह सुनिश्चित करता है कि घर में ऊर्जा का प्रवाह सही हो और सभी सदस्य स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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रसोईघर के लिए शुभ दिशाएं

वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर के निर्माण के लिए सबसे उत्तम दिशा आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) मानी जाती है। यह दिशा अग्नि के देवता को समर्पित है, जिससे रसोई में अग्नि का संतुलन बना रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिशा में बनी रसोई स्वास्थ्य और समृद्धि लाती है। इसके अतिरिक्त, यदि आग्नेय कोण में रसोई बनाना संभव न हो, तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) भी एक स्वीकार्य विकल्प है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इन दिशाओं में न बनाएं रसोई

उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रसोई बनाना वास्तु सम्मत नहीं माना जाता है। उत्तर दिशा धन आगमन की दिशा है, जबकि ईशान कोण देवताओं का स्थान है। इन दिशाओं में रसोई होने से धन हानि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और पारिवारिक कलह उत्पन्न हो सकता है।

सही दिशा में बना रसोईघर न केवल भोजन को शुद्ध और पौष्टिक बनाता है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों के मन और शरीर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। वास्तु के इन नियमों का पालन कर आप अपने घर को सुख, शांति और समृद्धि से भर सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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