



Vijaya Ekadashi: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का पावन पर्व मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजन करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विजया एकादशी 2026: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का दिव्य मार्ग
विजया एकादशी: पूजा विधि और धार्मिक महत्व
विजया एकादशी: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का पावन पर्व मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजन करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने भी लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले विजया एकादशी का व्रत किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें अपार सफलता मिली। यह व्रत सभी प्रकार के कष्टों और पापों का नाश कर पुण्यफल प्रदान करता है। एकादशी व्रत विधि का पालन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
विजया एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 23 फरवरी 2026, रात 09 बजकर 34 मिनट |
| एकादशी तिथि समाप्त | 24 फरवरी 2026, शाम 06 बजकर 05 मिनट |
| पारण का समय | 25 फरवरी 2026, प्रातः 06 बजकर 51 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक |
विजया एकादशी व्रत की पूजा विधि
- विजया एकादशी के दिन प्रातः काल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल लेकर विजया एकादशी व्रत का संकल्प लें।
- एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं और चंदन का तिलक लगाएं।
- पीले पुष्प, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- भगवान विष्णु को तुलसी दल, पंचामृत, माखन-मिश्री और ऋतुफल का भोग लगाएं।
- विजया एकादशी की कथा का पाठ करें और आरती करें।
- पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें।
- सायं काल में पुनः भगवान विष्णु की पूजा करें और फलाहार ग्रहण करें।
- अगले दिन द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं पारण करें।
विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
विजया एकादशी का व्रत महाभारत काल से भी पहले से प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान राम माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए लंका जा रहे थे, तब समुद्र पार करने में उन्हें कठिनाई आ रही थी। तब ऋषि वकदाल्भ्य के सुझाव पर भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से उन्होंने समुद्र पर सेतु का निर्माण कर लंका पर विजय प्राप्त की। यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है बल्कि व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन व्रत करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मंत्र जाप
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
शांतिरस्तु पुष्टिस्तु तुष्टिस्तु वृद्धिस्तु।
अविघ्नमस्तु आयुष्मानस्तु आरोग्यमस्तु।
उपाय और निष्कर्ष
विजया एकादशी का यह पावन व्रत सच्चे श्रद्धाभाव से करने वाले व्यक्ति को निश्चय ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत जीवन के हर संघर्ष में विजय दिलाने वाला है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं और वस्त्र दान करें। गौ सेवा करने से भी भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रकार विजया एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं और उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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