back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 13, 2026
spot_img

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर श्रीकृष्ण का युधिष्ठिर, श्री राम का लंका विजयी मंत्र… संकट निदान और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला पावन व्रत…क्या करें उपाय

spot_img
- Advertisement - Advertisement

Vijaya Ekadashi 2026: पावन एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है, और इनमें विजया एकादशी का अपना एक विशेष महत्व है। यह व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाता है और भक्तों के समस्त संकटों को हर लेता है। आइए, वर्ष 2026 में पड़ने वाली इस पुण्यदायिनी विजया एकादशी के व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करें।

- Advertisement -

विजया एकादशी 2026: शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला पावन व्रत

विजया एकादशी 2026: व्रत का विधान और फल

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है, और फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली विजया एकादशी का महत्व तो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से भगवान राम ने लंका विजय से पूर्व सागर पार करने में सफलता प्राप्त की थी। यह व्रत न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाता है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, प्रसिद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला भी माना जाता है। इस पवित्र दिन भगवान नारायण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और व्रत का पालन करने से व्यक्ति के सभी पापों का शमन होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष फलदायी है जो किसी कार्य में सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं या किसी प्रकार के भय अथवा बाधा से मुक्ति चाहते हैं। इस दिन पवित्र मन से भगवान विष्णु का स्मरण करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

- Advertisement -

पंचाग के अनुसार विजया एकादशी का व्रत जिस फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को पड़ता है वह पावन तिथि 12 फरवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 12:22 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को दोपहर 02:25 बजे तक रहेगी. इस तरह उदया तिथि के अनुसार विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026 को ही रखा जाएगा

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  शनि प्रदोष व्रत 2026: कब है पावन Pradosh Vrat, महत्व और पूजा विधि, जानिए दुर्लभ संयोग

विजया एकादशी व्रत की पूजा विधि

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें।
  • पूजा स्थल पर एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और चंदन का तिलक लगाएं।
  • उन्हें पीले फूल, मौसमी फल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • विजया एकादशी व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ या श्रवण करें।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • अंत में भगवान की आरती करें और उनसे अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।
  • पूरे दिन निराहार रहकर अथवा फलाहार करते हुए व्रत का पालन करें।
  • रात्रि में जागरण कर भगवान का भजन-कीर्तन करें।
  • अगले दिन (द्वादशी तिथि को) ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें और फिर व्रत का पारण करें।
यह भी पढ़ें:  आज का पंचांग 13 फरवरी 2026: विजया एकादशी के शुभ योग और ग्रहों की स्थिति

विजया एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

विजया एकादशी का व्रत पूर्णतः आध्यात्मिक लाभ प्रदान करने वाला है। वर्ष 2026 में विजया एकादशी की सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त (यह जानकारी मूल सामग्री में उपलब्ध नहीं है, अतः यहाँ केवल प्रारूप प्रस्तुत किया गया है):
सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त के लिए किसी प्रतिष्ठित पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

व्रत कथा और महत्व

विजया एकादशी की कथा अत्यंत प्रेरणादायक है। रामायण काल में जब भगवान राम अपनी सेना के साथ लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र तट पर पहुँचे, तब समुद्र को पार करने की समस्या खड़ी हो गई। भगवान राम ने ऋषि-मुनियों से इसका उपाय पूछा, तब ऋषि बकदाल्भ्य ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। भगवान राम ने उनके निर्देशानुसार इस व्रत का पालन किया, जिसके प्रभाव से समुद्र ने मार्ग दिया और उन्होंने लंका पर विजय प्राप्त की। यह कथा दर्शाती है कि विजया एकादशी का व्रत करने से कैसी भी कठिन परिस्थिति हो, व्यक्ति को उस पर विजय अवश्य मिलती है। यह व्रत जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा।

निष्कर्ष और उपाय

विजया एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें जीवन में हर कार्य में सफलता मिलती है और अंततः उन्हें वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन संध्याकाल में तुलसी के समक्ष दीपक जलाने और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी संकट दूर होते हैं। अपने मन, वचन और कर्म से शुद्ध होकर इस व्रत का पालन करें और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करें।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

राजेंद्र नाथ: वह हास्य कलाकार जो नायक पर भी भारी पड़ जाता था!

Rajendra Nath News: हिंदी सिनेमा के सुनहरे पर्दे पर जब-जब हास्य के किरदारों की...

आईटी स्टॉक्स पर एआई का साया: ₹6 लाख करोड़ स्वाहा, TCS 2020 के स्तर से नीचे

IT Stocks: वैश्विक शेयर बाजारों में जारी अनिश्चितता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर...

शुभमन गिल: तांत्रिक फोटो का क्या है असली सच, अफवाहों पर न करें यकीन

Shubman Gill: भारतीय क्रिकेट के युवा सनसनी शुभमन गिल अक्सर अपनी बल्लेबाजी से सुर्खियां...

भारत का Telecom Subscriber Base 1.3 अरब के पार: जियो का जलवा बरकरार, एयरटेल ने मारी बाजी

Telecom Subscriber Base: भारतीय दूरसंचार बाजार में दिसंबर 2025 का महीना एक नई तस्वीर...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें