



Vijaya Ekadashi: फाल्गुन मास की पहली एकादशी का पावन पर्व शीघ्र ही आने वाला है। इस विशेष दिन पर विजया एकादशी का व्रत रखकर कथा का श्रवण करने से जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
विजया एकादशी: जीवन में विजय और सौभाग्य का द्वार
विजया एकादशी का महात्म्य और फल
फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह पावन तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और धार्मिक ग्रंथों में इसका विशेष उल्लेख मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और निष्ठा से व्रत रखने वाले भक्तों को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन के हर पड़ाव पर सफलता मिलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक बल प्रदान करता है और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। इस व्रत को रखने से पूर्व इसकी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानना अत्यंत आवश्यक है।
विजया एकादशी पूजा विधि
- एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- उन्हें पीले वस्त्र, पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य (फल, मिठाई) अर्पित करें।
- गंगाजल से भगवान का अभिषेक करें।
- इसके बाद विजया एकादशी व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें अथवा श्रवण करें।
- भगवान विष्णु के प्रिय मंत्रों का जाप करें।
- अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करें।
- पूरे दिन फलाहार व्रत रखें और अगले दिन द्वादशी तिथि में ब्राह्मणों को भोजन कराकर पारण करें।
मुहूर्त
| विवरण | समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 06 मार्च, 2024 सुबह 06:30 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 07 मार्च, 2024 सुबह 04:13 बजे |
| व्रत पारण का समय | 07 मार्च, 2024 दोपहर 01:30 बजे से 03:50 बजे तक |
विजया एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्री राम माता सीता की खोज में लंका जाने की तैयारी कर रहे थे, तब उनके सामने विशाल समुद्र को पार करने की चुनौती थी। भगवान राम ने ऋषि-मुनियों से इस समस्या का समाधान पूछा। तब एक ऋषि ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। भगवान राम ने उनकी आज्ञा का पालन करते हुए पूरी श्रद्धा से विजया एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें समुद्र पार करने का मार्ग मिला और रावण पर विजय प्राप्त हुई। तभी से इस एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है और माना जाता है कि यह व्रत हर कार्य में विजय दिलाने वाला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंत्र जाप का महत्व
इस पावन दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है और मन को शांति प्राप्त होती है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
श्री राम जय राम जय जय राम।
निष्कर्ष और उपाय
विजया एकादशी का यह पावन व्रत न केवल आपको आध्यात्मिक रूप से सशक्त करता है, बल्कि लौकिक जीवन में भी सफलता और सुख-समृद्धि प्रदान करता है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत संकल्प और श्रद्धा का प्रतीक है, जिसे सच्चे मन से करने पर निश्चित रूप से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
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