



Vinayak Chaturthi 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह पावन चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है, जब विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य श्री गणेश की आराधना कर भक्त जीवन के समस्त संकटों से मुक्ति पाते हैं। यह दिन विशेष रूप से व्रत रखने और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने के लिए समर्पित है।
Vinayak Chaturthi 2026: वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत और पूजा विधि
माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को वैनायकी गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। हर माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह तिथि भगवान गणेश की दिव्य ऊर्जा से जुड़ने का दिन है, इस दिन वैनायकी चतुर्थी व्रत रखने का विधान है। फरवरी 2026 में यह शुभ तिथि 21 फरवरी 2026 दिन शनिवार को पड़ रही है। शनिवार का दिन होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि शनिवार को भगवान गणेश की पूजा से शनि दोषों का शमन भी होता है। यह पावन पर्व भक्तों को सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है। इस दिन की गई गणेश जी की आराधना विशेष फलदायी होती है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। चतुर्थी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान गणेश हैं, इसलिए इस दिन इनकी पूजा विधि पूर्वक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस पावन अवसर पर सही पूजा विधि का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
वैनायकी Vinayak Chaturthi 2026 का महत्व और शुभ मुहूर्त
वैनायकी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
वैनायकी गणेश चतुर्थी के लिए वर्ष 2026 में शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय इस प्रकार है:
| विवरण | समय |
|---|---|
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 21 फरवरी 2026, सुबह 08:30 बजे |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 22 फरवरी 2026, सुबह 06:15 बजे |
| पूजा का शुभ मुहूर्त | 21 फरवरी 2026, सुबह 11:30 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक |
| राहुकाल का समय | 21 फरवरी 2026, सुबह 09:00 बजे से सुबह 10:30 बजे तक |
गणेश चतुर्थी पूजा विधि
वैनायकी गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा इस प्रकार करें:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- गणेश जी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
- उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, दूर्वा घास, लाल पुष्प, शमी के पत्ते और सिंदूर अर्पित करें।
- मोदक, लड्डू, फल और नैवेद्य चढ़ाएं।
- धूप, दीप प्रज्वलित करें और गणेश चालीसा का पाठ करें।
- गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।
- अंत में आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें।
राहुकाल और व्रत के नियम
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का वरदान प्राप्त है। किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करने से वह कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है। वैनायकी चतुर्थी पर गणेश जी की उपासना से घर में सुख-शांति बनी रहती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राहुकाल के समय में शुभ कार्य या पूजा-पाठ करने से बचना चाहिए।
ॐ गं गणपतये नमः।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
वैनायकी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और विधि-विधान से किए गए अनुष्ठान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन गणेश जी को दूर्वा और मोदक का भोग लगाने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।



