CBSE Board Exam: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इस साल से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों की जांच के तरीके में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रहा है, जिससे छात्रों के मूल्यांकन में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ेगी। अब तक जहां उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पारंपरिक रूप से कागज पर की जाती थी, वहीं अब इसकी जगह अत्याधुनिक ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस नई व्यवस्था के तहत, छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर कंप्यूटर की स्क्रीन पर जांचा जाएगा। बोर्ड का मानना है कि इस पहल से जांच प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष, तेज और विश्वसनीय बनेगी।
CBSE Board Exam: अब कंप्यूटर पर जांची जाएंगी कॉपियां, जानें नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम
ऑन-स्क्रीन मार्किंग का सीधा अर्थ है कि छात्रों की आंसर शीट को डिजिटल रूप में स्कैन करके परीक्षकों को उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षक अपने कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर ही उत्तरों का अवलोकन करेंगे और वहीं सीधे अंक भी दर्ज करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के लिए सीबीएसई एक सुसंगत और सख्त मार्किंग स्कीम तैयार करेगा, जिसका पालन सभी परीक्षकों को करना होगा, ताकि हर छात्र को समान और निष्पक्ष मूल्यांकन मिल सके। इस तकनीकी बदलाव को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए एक विशेष एजेंसी का चयन भी किया जा रहा है, जो ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं का प्रबंधन करेगी।
CBSE Board Exam: ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से बदल जाएगी मूल्यांकन प्रक्रिया
इस नई जांच प्रणाली में सीबीएसई द्वारा निर्धारित मार्किंग स्कीम का कड़ाई से पालन किया जाएगा। परीक्षकों को सही स्टेप्स और प्रश्न के उत्तर में आवश्यक प्रमुख बिंदुओं के आधार पर अंक देने के निर्देश दिए जाएंगे। यह छात्रों के लिए काफी फायदेमंद होगा, खासकर उन छात्रों के लिए जो किसी प्रश्न का पूरा समाधान प्रस्तुत करते हैं, भले ही उनका अंतिम जवाब थोड़ा भिन्न क्यों न हो। बोर्ड का स्पष्ट मानना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में गलतियों की संभावना काफी कम होगी और छात्रों को उनके प्रत्येक सही प्रयास का पूरा श्रेय मिल पाएगा।
समय की बचत और गलतियों में कमी का लक्ष्य
सीबीएसई इस बात पर जोर देता है कि डिजिटल जांच प्रणाली से मूल्यांकन कार्य में लगने वाले समय में महत्वपूर्ण बचत होगी। अब फिजिकल कॉपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने की लंबी और जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। इससे जांच का काम तेजी से पूरा होगा और बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम भी पूर्व की तुलना में शीघ्रता से घोषित किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, मैनुअल जांच के दौरान होने वाली मानवीय त्रुटियों में भी काफी हद तक कमी आएगी। पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
तेज क्रॉस-चेकिंग और मॉडरेशन की सुविधा
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से क्रॉस-चेकिंग और मॉडरेशन की प्रक्रिया भी अधिक सुगम और तीव्र हो जाएगी। यदि किसी उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच की आवश्यकता होती है या उसे किसी अन्य परीक्षक को दिखाना होता है, तो इसमें समय की बर्बादी नहीं होगी। सब कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने के कारण, बोर्ड आसानी से यह निगरानी कर पाएगा कि कहीं किसी छात्र के साथ मूल्यांकन में कोई अन्याय तो नहीं हुआ है। इस प्रणाली से एक ही जवाब पर विभिन्न परीक्षकों द्वारा अलग-अलग अंक दिए जाने की समस्या का भी काफी हद तक समाधान होगा। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें
राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय
सीबीएसई का यह आधुनिक कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के बिल्कुल अनुरूप है। नई शिक्षा नीति का मुख्य लक्ष्य छात्रों को रटंत विद्या से दूर कर समझ आधारित शिक्षा और लेखन को प्रोत्साहित करना है। जब मूल्यांकन प्रक्रिया स्पष्ट और परिभाषित नियमों के तहत होगी, तो स्वाभाविक रूप से छात्रों का ध्यान भी सही तरीके से सीखने और लिखने पर केंद्रित होगा। बोर्ड का कहना है कि यह प्रणाली शिक्षा के क्षेत्र में समानता और गुणवत्ता लाने में एक सहायक भूमिका निभाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कक्षा 10वीं में भी हो सकता है लागू
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम सफलतापूर्वक लागू होता है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं, तो अगले वर्ष से इसे कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में भी विस्तारित किया जा सकता है। यह विस्तार पूरे बोर्ड सिस्टम में एक समान, कुशल और आधुनिक मूल्यांकन प्रक्रिया को अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।







