
दिल्ली समाचार: CBSE ने 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के छात्रों के लिए एक ऐसा फरमान जारी किया है, जो उन्हें चौंका सकता है और अगर इसका पालन नहीं हुआ, तो सीधे नंबर कटेंगे! विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के पेपर में अब सवालों के जवाब देने का तरीका पूरी तरह बदल गया है. क्या है यह नया नियम और क्यों करना होगा हर सेक्शन को फॉलो, जानिए विस्तार से.
बोर्ड परीक्षा के लिए अहम बदलाव – CBSE Board Exam 2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों का सीधा असर उन सभी विद्यार्थियों पर पड़ेगा, जो आगामी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले हैं. बोर्ड ने विशेष रूप से विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों की उत्तरपुस्तिका में जवाब लिखने की प्रणाली और प्रश्नपत्र के स्वरूप में व्यापक बदलाव किए हैं. ये नए दिशानिर्देश CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर भी उपलब्ध कराए गए हैं.
क्यों बदले नियम?
CBSE का उद्देश्य है कि विद्यार्थी अपने उत्तरों को अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत कर सकें. पहले अक्सर देखा जाता था कि छात्र इन विषयों के जवाब एक ही क्रम में लिख देते थे, जिससे उत्तरों में अव्यवस्था होती थी और मूल्यांकन के दौरान परीक्षक को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता था. इस समस्या को दूर करने और मूल्यांकन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ही बोर्ड ने यह कठोर और स्पष्ट नियम लागू किया है. अब प्रश्नपत्रों को अलग-अलग खंडों में विभाजित किया गया है, और छात्रों को उन्हीं खंडों के अनुसार उत्तर देने होंगे.
विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का नया फॉर्मेट
विज्ञान विषय का प्रश्नपत्र अब तीन प्रमुख खंडों में विभाजित होगा. सबसे पहले ‘खंड अ’ में जीव विज्ञान (Biology) से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे. इसके बाद ‘खंड ब’ में रसायन विज्ञान (Chemistry) के सवाल होंगे और अंत में ‘खंड स’ में भौतिक विज्ञान (Physics) के प्रश्नों को समाहित किया जाएगा. विद्यार्थियों को अपनी उत्तरपुस्तिका में भी ठीक इसी क्रम का पालन करते हुए, इन तीनों खंडों के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाकर ही जवाब लिखने होंगे. यदि किसी छात्र ने गलती से भौतिक विज्ञान का उत्तर जीव विज्ञान वाले खंड में लिख दिया, तो उस प्रश्न के लिए उसे कोई अंक नहीं दिए जाएंगे.
इसी प्रकार, सामाजिक विज्ञान का प्रश्नपत्र भी चार अलग-अलग खंडों में बांटा गया है. ‘खंड अ’ इतिहास (History) के लिए, ‘खंड ब’ भूगोल (Geography) के लिए, ‘खंड स’ राजनीति विज्ञान (Political Science) के लिए और ‘खंड द’ अर्थशास्त्र (Economics) के प्रश्नों के लिए निर्धारित किया गया है. छात्रों को उत्तरपुस्तिका में भी स्पष्ट रूप से चार खंड बनाने होंगे और संबंधित विषय के उत्तर केवल उसी निर्धारित खंड में लिखने होंगे.
बोर्ड के सख्त निर्देश
CBSE ने विद्यार्थियों को इस संबंध में तीन प्रमुख और अत्यंत महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:
- विज्ञान की उत्तरपुस्तिका में तीन अलग-अलग खंड (अ, ब, स) और सामाजिक विज्ञान की उत्तरपुस्तिका में चार अलग-अलग खंड (अ, ब, स, द) बनाना आवश्यक है.
- किसी भी खंड का उत्तर किसी दूसरे खंड में नहीं लिखा जा सकता. यानी, यदि आपने जीव विज्ञान का प्रश्न हल किया है, तो उसका उत्तर ‘खंड अ’ में ही होना चाहिए, न कि ‘खंड ब’ या ‘खंड स’ में.
- सबसे महत्वपूर्ण और सख्त निर्देश यह है कि यदि कोई छात्र इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके द्वारा लिखे गए उस उत्तर का मूल्यांकन बिल्कुल नहीं किया जाएगा. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गलती होने पर उत्तरों की पुनः जांच (re-checking) या पुनर्मूल्यांकन (re-evaluation) के दौरान भी इस स्थिति को ठीक नहीं किया जा सकेगा. इसका सीधा अर्थ है कि एक छोटी सी गलती के कारण विद्यार्थी अपने अंक गंवा सकता है.





