back to top
⮜ शहर चुनें
जनवरी, 24, 2026
spot_img

Delhi School Admission: नर्सरी और कक्षा-1 में दाखिले के लिए पास के स्कूल क्यों हैं बेहतर, जानें निजी स्कूलों की अहम सलाह

spot_img
- Advertisement - Advertisement

Delhi School Admission: दिल्ली में अपने बच्चे को नर्सरी या पहली कक्षा में दाखिला दिलाने की सोच रहे हैं, तो निजी स्कूलों की यह सलाह आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से पास के स्कूल को चुनने की अपील कर रहे हैं, ताकि बच्चों को लंबी यात्रा की थकान और ट्रैफिक जाम से बचाया जा सके।

- Advertisement -

Delhi School Admission: नर्सरी और कक्षा-1 में दाखिले के लिए पास के स्कूल क्यों हैं बेहतर, जानें निजी स्कूलों की अहम सलाह

दिल्ली के निजी स्कूलों ने यह स्पष्ट किया है कि घर के नजदीक वाले स्कूल का चुनाव करना बच्चों के भविष्य के लिए एक समझदारी भरा निर्णय है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं, जो बच्चों की पढ़ाई और उनके संपूर्ण विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

- Advertisement -

नर्सरी और कक्षा-1 के Delhi School Admission में पास का स्कूल क्यों है जरूरी?

स्कूलों का मानना है कि दूर-दराज के स्कूलों में जाने वाले बच्चे अक्सर लंबे सफर के कारण जल्दी थक जाते हैं। यह थकान उनकी एकाग्रता को प्रभावित करती है और पढ़ाई पर भी बुरा असर डालती है। इसके अलावा, दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या आम है, जिससे बच्चों का काफी समय बर्बाद होता है और उनकी दिनचर्या भी बिगड़ जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक प्रमुख स्कूल प्रिंसिपल ने कहा, ‘दिल्ली में ट्रैफिक जाम रोजमर्रा की बात है। ऐसे में घर के पास स्कूल होने से बच्चे को सुबह-शाम की लंबी यात्रा की थकान से बचाया जा सकता है, जिससे वह तरोताजा महसूस करेगा और पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर पाएगा।’ पास के स्कूल में पढ़ने से बच्चों को प्रदूषण का खतरा भी कम रहता है और अनावश्यक यात्रा से बचते हैं।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  MPPSC Recruitment: मध्य प्रदेश में डीएसपी समेत 150 से अधिक पदों पर बंपर भर्ती

कैसे तय होता है एडमिशन में बच्चों का चयन?

निजी स्कूलों की एडमिशन प्रक्रिया में दूरी एक महत्वपूर्ण मानदंड है। आमतौर पर, स्कूल से 0 से 1 किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले बच्चों को दाखिला प्रक्रिया में सबसे ज्यादा अंक दिए जाते हैं, जो लगभग 70 अंक तक हो सकते हैं। जैसे-जैसे बच्चे के घर और स्कूल की दूरी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे अंकों में कमी आती जाती है। यही कारण है कि 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर रहने वाले बच्चों को सबसे कम अंक मिलते हैं। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यही है कि घर के पास रहने वाले बच्चों को दाखिला मिलने की संभावना सबसे अधिक हो। यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे को स्कूल आने-जाने में कोई परेशानी न हो। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें

अभिभावकों की राय और उनकी दुविधा

अभिभावकों की राय में भी पास के स्कूल को चुनना एक व्यावहारिक और बेहतर विकल्प है। नजदीक स्कूल होने से बच्चा रोज कम थकता है और स्कूल आसानी से समय पर पहुंच जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने की झंझट भी कम होती है, जिसका बच्चे की सेहत और पढ़ाई दोनों पर सकारात्मक असर पड़ता है। हालांकि, कुछ अभिभावकों की यह भी चिंता रहती है कि अगर उनका पसंदीदा स्कूल घर से दूर है, तो क्या उनके बच्चे को एडमिशन प्रक्रिया में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और क्या दूरी के कारण उन्हें कम मौका मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फिर भी, अधिकांश लोग यह मानते हैं कि दिल्ली की रोजमर्रा की भागदौड़ और ट्रैफिक जाम को देखते हुए, नजदीकी स्कूल ही सबसे सुविधाजनक विकल्प है और बच्चे के दैनिक रूटीन के लिए यह ज्यादा अच्छा रहता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

आज का राशिफल 24 जनवरी 2026: शनिवार का दिन, ग्रहों की नई चाल और आपका भविष्य

Aaj Ka Rashifal: ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों में ग्रहों की चाल का अध्ययन आदिकाल...

आज का राशिफल: 24 जनवरी 2026 का ज्योतिषीय मार्गदर्शन

Aaj Ka Rashifal आज का राशिफल: 24 जनवरी 2026 का ज्योतिषीय मार्गदर्शनदिव्य ब्रह्मांड की रहस्यमय...

आज का पंचांग: 24 जनवरी 2026 का शुभ-अशुभ समय और ग्रह स्थिति

Aaj Ka Panchang: प्रत्येक दिवस प्रकृति और ग्रहों की गूढ़ शक्तियों से अनुप्राणित होता...

Ratha Saptami 2026: रथ सप्तमी पर करें ये खास उपाय, प्रसन्न होंगे भगवान सूर्य!

Ratha Saptami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाने...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें