

Engineering Admission: अब वैदिक शिक्षा बोर्ड से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश का रास्ता खुल गया है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए इन छात्रों को सामान्य बोर्ड के विद्यार्थियों के समान मानने का निर्देश दिया है। यह कदम तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए बदलाव लाने वाला साबित होगा।
इंजीनियरिंग एडमिशन: वैदिक छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा के द्वार खुले
इंजीनियरिंग एडमिशन में नए अवसर
देश की सबसे बड़ी तकनीकी शिक्षा नियामक संस्था, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। AICTE ने अपने सभी संबद्ध कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे वैदिक शिक्षा प्रणाली से उत्तीर्ण छात्रों को भी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अन्य बोर्ड के छात्रों के बराबर ही मानें। इस फैसले से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो अब तक अपनी वैदिक शिक्षा के कारण तकनीकी पाठ्यक्रमों से वंचित रह जाते थे।
यह निर्णय महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (MSRVSSB) से संबंधित है। इस बोर्ड द्वारा जारी किए गए ‘वेद भूषण’ और ‘वेद विभूषण’ प्रमाण पत्रों को अब AICTE ने क्रमशः कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं के समकक्ष मान्यता दे दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे पहले, इन छात्रों को इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी कोर्स में दाखिला लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ता था। AICTE ने यह जानकारी देश भर के लगभग 9,000 मान्यता प्राप्त कॉलेजों, तकनीकी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और राज्य सरकारों को एक पत्र के माध्यम से दी है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि वैदिक शिक्षा बोर्ड से उत्तीर्ण छात्र निर्धारित योग्यता पूरी करते हैं, तो उन्हें इंजीनियरिंग में प्रवेश से रोका नहीं जाना चाहिए।
वैदिक शिक्षा और तकनीकी पाठ्यक्रमों की योग्यता
महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (MSRVSSB) का पाठ्यक्रम मुख्य रूप से वेदों के गहन अध्ययन पर केंद्रित होता है, जिसमें मंत्रों, श्लोकों और उनके अर्थों को याद करने पर जोर दिया जाता है। हालांकि, इसमें अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों की भी आंशिक पढ़ाई शामिल होती है, जो छात्रों को एक समग्र शैक्षणिक पृष्ठभूमि प्रदान करती है। वैदिक शिक्षा में सही उच्चारण और स्मरण शक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है।
AICTE के नियमों के अनुसार, इंजीनियरिंग (बीटेक) में प्रवेश के लिए किसी भी छात्र को कक्षा 12वीं में भौतिकी (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) और गणित (Mathematics) विषयों का अध्ययन करना अनिवार्य है। अब AICTE ने साफ कर दिया है कि यदि वैदिक बोर्ड से पास छात्र इस शैक्षणिक योग्यता को पूरा करते हैं, तो उन्हें भी अन्य केंद्रीय या राज्य बोर्डों के छात्रों के समान ही अवसर दिए जाएं। AICTE के सलाहकार एन.एच. सिद्धलिंगा स्वामी ने 28 जनवरी को जारी अपने पत्र में कहा है कि MSRVSSB से परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (AIU) पहले ही इस बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की योग्यता को मान्यता दे चुका है। यह महत्वपूर्ण जानकारी आपको देशज टाइम्स बिहार का N0.1 पर मिल रही है।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने भी MSRVSSB को एक नियमित स्कूल बोर्ड के रूप में मान्यता दी है। इसका अर्थ है कि इस बोर्ड द्वारा प्रदान किए गए प्रमाण पत्र अब देश के अन्य केंद्रीय और राज्य बोर्डों के प्रमाण पत्रों के बराबर माने जाएंगे, जिससे इन छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते और भी प्रशस्त होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली रहने वाली सीटों को भरने में मदद मिल सकती है। हर साल, देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में, कई निजी कॉलेज वैदिक बोर्ड के छात्रों को दाखिला देने में रुचि दिखा सकते हैं, जिससे सीटों को भरने में सहायता मिलेगी। हालांकि, इसके साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती भी सामने आ सकती है। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


