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मार्च, 4, 2026
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आईआईटी बॉम्बे रचेगा इतिहास: विदेश में खुलेगा पहला कैंपस, ये है मास्टरप्लान!

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भारत के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थान, आईआईटी बॉम्बे, अब दुनिया के नक्शे पर अपनी धाक जमाने को तैयार है। एक ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत अगले कुछ सालों में यह संस्थान सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी अपनी जड़ें जमाएगा। पहला कदम अमेरिका में उठाया जा सकता है, जो दुनिया के सामने भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति का नया चेहरा पेश करेगा।

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वैश्विक विस्तार की रणनीति और लक्ष्य

आईआईटी बॉम्बे ने वर्ष 2030 तक अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस स्थापित करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, पहला विदेशी केंद्र अमेरिका में खोले जाने की संभावना है। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा हाल ही में अनुमोदित “स्ट्रेटेजी प्लान 2026-2030 एंड बियॉन्ड” के तहत यह पहल की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य आईआईटी बॉम्बे को दुनिया की शीर्ष तकनीकी यूनिवर्सिटीज की सूची में शामिल करना है। इस दूरदर्शी रणनीति को तैयार करने में संस्थान के शिक्षकों, छात्रों, पूर्व छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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शिक्षा में नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी

आईआईटी बॉम्बे अब अपनी शिक्षा प्रणाली को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में अग्रसर है। इस नई व्यवस्था में छात्रों को अधिक व्यावहारिक अनुभव, परियोजनाओं पर काम करने के अवसर और सीखने के नवीनतम तरीके उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी क्रम में, संस्थान दुनिया की शीर्ष 50 यूनिवर्सिटीज के साथ कई ग्लोबल प्रोग्राम शुरू करने की योजना बना रहा है, जिनमें शामिल हैं:

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  • 2+2 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम
  • संयुक्त शोध पहल
  • छात्र विनिमय कार्यक्रम
  • डुअल डिग्री प्रोग्राम
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संस्थान का यह भी मानना है कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और अन्य नई तकनीकों का हर क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा। इसलिए, आईआईटी बॉम्बे इन विषयों को सभी शैक्षणिक अनुशासनों का अभिन्न अंग बनाने जा रहा है। इसका लक्ष्य ऐसे तकनीकी पेशेवरों को तैयार करना है जो अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ AI और नई तकनीकों का भी गहन ज्ञान रखते हों, ताकि वे बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल सकें।

सीमांत क्षेत्रों में शोध का नेतृत्व

रणनीति का दूसरा प्रमुख स्तंभ सीमांत (फ्रंटियर) क्षेत्रों में शोध का नेतृत्व करना है। इसके लिए, संस्थान निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में बड़े अनुसंधान सेटअप तैयार करेगा:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग
  • जलवायु तकनीक
  • क्वांटम टेक्नोलॉजी
  • सेमीकंडक्टर
  • मेडटेक
  • एडवांस्ड मटेरियल
  • स्पेस और डिफेंस
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इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए नए अंतर-अनुशासनात्मक केंद्र स्थापित किए जाएंगे और विशेषज्ञ फैकल्टी की भर्ती की जाएगी।

उद्योग और समाज से जुड़ाव: डीप-टेक फंड की शुरुआत

तीसरा महत्वपूर्ण हिस्सा उद्योग और समाज से जुड़े नवाचार को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य है कि आईआईटी बॉम्बे में होने वाले शोध को सीधे उद्योग जगत तक पहुंचाया जाए, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया जाए, और ऐसे विचारों को बढ़ावा दिया जाए जो समाज में सीधा सकारात्मक बदलाव ला सकें। इसी सोच के साथ, आईआईटी बॉम्बे ने हाल ही में एक बड़ी पहल करते हुए अपना डीप-टेक वेंचर कैपिटल फंड लॉन्च किया है।

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संस्थान ने SINE के तहत “Y-पॉइंट वेंचर कैपिटल फंड” की शुरुआत की है, जिसके लिए शुरुआती राशि 250 करोड़ रुपये रखी गई है। यह फंड उन स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा जिनके आइडिया विज्ञान और तकनीक पर आधारित होते हैं, और जिन्हें बाजार तक पहुंचने के लिए अधिक समय व निवेश की आवश्यकता होती है। यह फंड 25-30 डीप-टेक स्टार्टअप्स को प्री-सीड से लेकर सीड स्टेज तक 15 करोड़ रुपये तक का निवेश देने में सक्षम होगा।

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