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फ़रवरी, 20, 2026
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Maithili Language: मैथिली एजुकेशन से मिलेगी केमिस्ट्री समझने में आसानी, पढ़िए Darbhanga LNMU की नई शिक्षा नीति@Commission of Scientific and Technical Terminology…नई पहल… 3500 शब्दों का अनुवाद

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विज्ञान और गणित जैसे विषयों को परंपरागत रूप से कठिन माना जाता रहा है, खासकर उनकी जटिल तकनीकी शब्दावली के कारण। लंबे समय से यह धारणा रही है कि यदि किसी भी विषय को मातृभाषा में पढ़ाया जाए तो उसे समझना अधिक सरल हो जाता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए, भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग (Commission of Scientific and Technical Terminology) ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सहयोग से रसायन विज्ञान की मूलभूत शब्दावली को मैथिली में तैयार कर प्रकाशित किया है। यह Commission of Scientific and Technical Terminology बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह नई शिक्षा नीति 2020 के तहत किया गया पहला कदम है, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

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मैथिली एजुकेशन: 3500 से अधिक शब्दों का अनुवाद

इस महत्वपूर्ण योजना के तहत, रसायन विज्ञान की लगभग 3500 से अधिक तकनीकी शब्दावली का मैथिली भाषा में अनुवाद किया गया है। इन महत्वपूर्ण शब्दों की उपलब्धता से कक्षा 12वीं तक की केमिस्ट्री की पुस्तकों को मैथिली में तैयार करना काफी आसान हो जाएगा। यह माना जा रहा है कि इस कदम से मिथिलांचल के छात्रों को विज्ञान विषयों को समझने में बहुत राहत मिलेगी। नई शिक्षा नीति क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देती है, और यह शब्दावली इसी दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। इसके अतिरिक्त, शिक्षा मंत्रालय की योजना है कि भविष्य में अन्य विषयों की किताबों को भी मैथिली में उपलब्ध कराया जाए।

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इस पहल का सीधा लाभ स्कूल स्तर के छात्रों, विशेषकर 12वीं तक के विद्यार्थियों को मिलेगा। तकनीकी शब्दों की पर्याप्त उपलब्धता से केमिस्ट्री की किताबों का अनुवाद और उनका अध्ययन दोनों ही सरल हो जाएंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, भविष्य में राजनीति शास्त्र और पत्रकारिता जैसे विषयों की शब्दावली भी मैथिली में तैयार की जा रही है। साथ ही, इसी तरह का कार्य अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी जारी है। आपको बता दें कि इस शब्दावली को तैयार करने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था, जिसमें रसायन विज्ञान के विशेषज्ञों के साथ-साथ हिंदी, मैथिली और अंग्रेजी भाषा के विशेषज्ञ भी शामिल थे। इस समिति में डॉ. प्रेम मोहन मिश्र, डॉ. अवधेश कुमार मिश्र, प्रो. देवनारायण झा, डॉ. अजय कुमार मिश्र, डॉ. बीणा ठाकुर, डॉ. सुरेंद्र भारद्वाज, डॉ. संजय कुमार झा, डॉ. सविता झा और डॉ. वागीश कुमार झा जैसे कई शिक्षाविदों और प्रोफेसरों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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छात्रों के लिए शिक्षा के नए द्वार

यह पहल न केवल मिथिलांचल के छात्रों को लाभ पहुंचाएगी बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूत करेगी। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। मातृभाषा में जटिल विषयों की पढ़ाई से छात्रों में विषय के प्रति रुचि बढ़ेगी और उनकी समझ भी बेहतर होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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