

NEET Admission: जबलपुर के एक छोटे से शहर से निकलकर अथर्व नाम के एक छात्र ने न केवल अपनी मेहनत से NEET परीक्षा पास की, बल्कि सिस्टम की कमी को चुनौती देते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत तक का सफर तय किया। यह कहानी सिर्फ एक मेडिकल सीट पाने की नहीं, बल्कि हार न मानने वाले उस अदम्य साहस की है, जिसने मुश्किलों के आगे घुटने टेकने से इनकार कर दिया।
# NEET Admission: एक छात्र का संघर्ष, जिसने सुप्रीम कोर्ट में जीती मेडिकल सीट
NEET Admission: जबलपुर के एक छोटे से शहर से निकलकर अथर्व नाम के एक छात्र ने न केवल अपनी मेहनत से NEET परीक्षा पास की, बल्कि सिस्टम की कमी को चुनौती देते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत तक का सफर तय किया। यह कहानी सिर्फ एक मेडिकल सीट पाने की नहीं, बल्कि हार न मानने वाले उस अदम्य साहस की है, जिसने मुश्किलों के आगे घुटने टेकने से इनकार कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अथर्व, जिसकी दुनिया किताबें, क्रिकेट और डॉक्टर बनने के सपनों के इर्द-गिर्द घूमती थी, ने दो बार NEET परीक्षा में 530 अंक हासिल किए। वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे से संबंधित था, और यह कोटा उसके लिए मेडिकल सीट की उम्मीद की किरण था। हालांकि, निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण को लेकर राज्य में स्पष्ट नियम न होने के कारण, इतनी मेहनत के बावजूद उसे सीट नहीं मिल पाई। यह स्थिति किसी भी छात्र के लिए बेहद निराशाजनक हो सकती है, जब कड़ी मेहनत के बाद भी मंजिल दूर लगे। ऐसे में EWS आरक्षण के नियमों की स्पष्टता बेहद जरूरी हो जाती है।
## NEET Admission: अथर्व का कानूनी संघर्ष
अथर्व ने इस अन्याय के सामने झुकने के बजाय अपनी आवाज बुलंद की। उसने पहले जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ उसे मज़ाक में कहा गया कि “तुम्हें वकील बनना चाहिए, डॉक्टर नहीं।” इस टिप्पणी ने उसे और भी दृढ़ बना दिया। उसने तय किया कि वह अपने हक की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ेगा। घर में उसके पिता वकील हैं, और लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन अदालती कार्यवाही देखकर अथर्व को कानून की बारीकियों को समझने में मदद मिली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उसने खुद कानून के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया, पुराने फैसलों को समझा और सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) तैयार की। रजिस्ट्री द्वारा बताई गई गलतियों को सुधारते हुए, उसने आखिरकार अपनी याचिका सफलतापूर्वक दाखिल कर दी।
## सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुनवाई के दिन अथर्व ऑनलाइन माध्यम से जुड़ा। जब अदालत की कार्यवाही समाप्त होने वाली थी, तब उसने विनम्रता से 10 मिनट का समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142 of the Constitution of India) का प्रयोग करते हुए यह ऐतिहासिक निर्देश दिया कि EWS वर्ग के योग्य छात्रों को प्रोविजनल एमबीबीएस एडमिशन दिया जाए। यह फैसला अथर्व के लिए सिर्फ एक न्यायिक आदेश नहीं था, बल्कि उसके डॉक्टर बनने के सपने को फिर से जीवंत करने जैसा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अथर्व के पिता ने बताया कि उनके बेटे ने कभी कानून की पढ़ाई नहीं की, लेकिन हर प्रक्रिया को बखूबी समझा। उसकी मां ने घर की सभी जिम्मेदारियां संभालीं, ताकि अथर्व की पढ़ाई पर कोई आंच न आए। स्कूल की शिक्षिकाओं ने भी उसे लगातार प्रोत्साहित किया। अंग्रेजी में उसका आत्मविश्वास और स्पष्ट बोलने की आदत ही उसकी अदालत में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।
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