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फ़रवरी, 15, 2026
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ओंटारियो ट्यूशन फीस: कनाडा में छात्रों पर बढ़ रहा है शिक्षा का बोझ, जानें क्या होंगे असर

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Ontario Tuition Fees: शिक्षा के क्षेत्र में आए दिन हो रहे बदलाव छात्रों के भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। हाल ही में ओंटारियो, कनाडा में सार्वजनिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी का प्रस्ताव आया है, जिससे हजारों छात्रों में चिंता का माहौल है। यह फैसला उच्च शिक्षा प्रणाली को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसका सीधा असर छात्रों की जेब पर पड़ने वाला है।

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ओंटारियो ट्यूशन फीस: कनाडा में छात्रों पर बढ़ रहा है शिक्षा का बोझ, जानें क्या होंगे असर

कनाडा के ओंटारियो प्रांत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्ष 2019 के बाद पहली बार यहां के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ट्यूशन फीस बढ़ाने की अनुमति दी गई है। 2019 में, उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के लिए फीस में 10 प्रतिशत की कटौती की गई थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से शैक्षणिक संस्थान लगातार यह तर्क दे रहे थे कि इस फैसले के कारण उनके बजट पर भारी दबाव पड़ा है। विशेष रूप से, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा में कटौती ने भी इस वित्तीय संकट को और बढ़ा दिया, जिसके चलते कई शैक्षणिक कार्यक्रमों और सेवाओं में कटौती करनी पड़ी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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ओंटारियो ट्यूशन फीस वृद्धि: क्या है नई नीति और इसका प्रभाव?

ओंटारियो सरकार ने अब एक नया वित्तीय ढांचा पेश किया है, जिसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अगले तीन वर्षों तक हर साल 2 प्रतिशत तक ट्यूशन फीस बढ़ाने की इजाजत दी जाएगी। इसके बाद, फीस वृद्धि मुद्रास्फीति दर पर आधारित होगी और तीन साल की औसत मुद्रास्फीति दर से अधिक नहीं होगी। यह परिवर्तन छात्रों पर कई स्तरों पर असर डालेगा। एक ओर, ओंटारियो के कॉलेज और विश्वविद्यालयों को अगले चार वर्षों में 6.4 बिलियन कनाडाई डॉलर का अतिरिक्त निवेश प्राप्त होगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता में सुधार होगा। दूसरी ओर, ट्यूशन फीस में वृद्धि से छात्रों के लिए शिक्षा की लागत बढ़ जाएगी।

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कॉलेज के छात्रों के लिए फीस में रोजाना लगभग 18 सेंट और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए 47 सेंट की बढ़ोतरी होगी। इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो पहले ही जीवन यापन के उच्च खर्चों का सामना कर रहे हैं। कनाडा में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पहले ही वीजा संबंधित चुनौतियाँ बढ़ गई हैं।

छात्र सहायता कार्यक्रमों में बदलाव

इसके अतिरिक्त, ओंटारियो सरकार ने अपने छात्र सहायता कार्यक्रम की संरचना में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब, छात्रों को उनकी कुल सहायता राशि का 25 प्रतिशत अनुदान (ग्रांट) के रूप में मिलेगा, और शेष 75 प्रतिशत ऋण (लोन) के रूप में। यह बदलाव उन छात्रों के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है जो पहले अनुदान पर अधिक निर्भर रहते थे। आलोचकों का मानना है कि इस नीति से छात्रों का कर्ज बढ़ेगा, जो पहले से ही महंगे किराए और बढ़ते खाद्य पदार्थों के खर्चों से जूझ रहे हैं। विपक्षी सांसदों ने भी इस पर चिंता जताई है कि फीस में वृद्धि और अनुदान में कटौती के कारण छात्रों पर आर्थिक दबाव और बढ़ जाएगा। यह स्थिति कई छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अपने सपने को पूरा करने में बाधा डाल सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

यह नई नीति ओंटारियो के कॉलेज और विश्वविद्यालयों को वित्तीय संकट से उबारने के लिए एक आवश्यक कदम मानी जा रही है। विशेषकर अंतरराष्ट्रीय नामांकन में गिरावट के कारण संस्थानों को पिछले कुछ सालों में भारी घाटा हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि फीस में मामूली वृद्धि भी उन छात्रों के लिए बहुत भारी पड़ सकती है जिनके पास सीमित संसाधन हैं। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। कनाडा में अध्ययन कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या काफी अधिक है, और इस नए ढांचे के तहत उन्हें विशेष रूप से अधिक वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि उनकी ट्यूशन फीस पहले से ही घरेलू छात्रों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में, यह बढ़ोतरी उनकी शिक्षा पूरी करने में और भी अधिक बाधाएँ उत्पन्न कर सकती है।

छात्रों के लिए संभावित चुनौतियां

इस नीति के परिणाम मिश्रित हो सकते हैं। संस्थानों के लिए यह वित्तीय स्थिरता की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन छात्रों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकती है। बढ़ी हुई फीस और ऋण पर अधिक निर्भरता छात्रों पर भारी पड़ सकती है। यह बदलाव कई छात्रों के लिए और भी अधिक वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है, खासकर उन छात्रों के लिए जिनके पास पहले से ही सीमित संसाधन हैं और जो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह छात्रों को होने वाली इन कठिनाइयों पर ध्यान दे और उनके लिए वैकल्पिक सहायता के रास्ते तलाशे ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ बनी रहे।

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