

Pariksha Pe Charcha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के नौवें संस्करण में देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधा संवाद किया। इस वर्ष, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परीक्षा में सिर्फ अंक ही सब कुछ नहीं होते हैं, बल्कि पढ़ाई, स्किल्स और शौक तीनों के बीच संतुलन ही छात्रों की असली पहचान बनाता है। उन्होंने छात्रों को जीवन के विभिन्न पहलुओं पर बहुमूल्य परीक्षा टिप्स दिए, जो उन्हें भविष्य में सफलता प्राप्त करने में सहायक होंगे।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1 और हम आपको बता रहे हैं कि पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में छात्रों के कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन में केवल एक चीज पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है। पढ़ाई, कौशल विकास और व्यक्तिगत रुचियों का साथ-साथ विकास करना आवश्यक है। यदि जीवन में सही संतुलन बना रहता है, तो सफलता का मार्ग अपने आप आसान हो जाता है।
Pariksha Pe Charcha में पीएम मोदी के महत्वपूर्ण संदेश
परीक्षा पर चर्चा के दौरान, पीएम मोदी ने अक्सर होने वाली इस बहस पर भी अपनी राय रखी कि अंक अधिक महत्वपूर्ण हैं या कौशल। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि परीक्षा को जीवन का अंतिम लक्ष्य न मानें। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल विकास का एक माध्यम है, जबकि वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। एक मजबूत नींव बनाने पर ध्यान केंद्रित करने से आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है और अनावश्यक दबाव भी कम होता है।
अंक बनाम कौशल: संतुलन ही कुंजी
प्रधानमंत्री ने ‘आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1’ में लाइफ स्किल्स और प्रोफेशनल स्किल्स के अंतर को भी समझाया। उन्होंने बताया कि प्रोफेशनल स्किल्स किताबों और अभ्यास से आती हैं, जबकि लाइफ स्किल्स अनुशासित जीवनशैली, अच्छे स्वास्थ्य और मजबूत संचार कौशल से विकसित होती हैं। किसी भी छात्र के लिए इन दोनों का संतुलन बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/education/।
एक छात्रा के गेमिंग को करियर बनाने के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी शौक को व्यावहारिक रूप देने के लिए उसे दूसरों के साथ साझा करना चाहिए। फीडबैक से नए विचार मिलते हैं और आगे बढ़ने की दिशा तय होती है। उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों पर एक जैसी समय सीमा या अपेक्षाएं न थोपें, क्योंकि हर छात्र की सीखने की गति अलग-अलग होती है। शिक्षकों को सलाह दी गई कि वे छात्रों से सिर्फ एक कदम आगे रहें, ताकि सीखने की प्रक्रिया सहज बनी रहे और कोई भी छात्र पीछे न छूटे। यह परीक्षा टिप्स छात्रों के भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगी।




