

UP Board Exam: उत्तर प्रदेश में चल रही बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने समूची शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आजमगढ़ जिले के एक परीक्षा केंद्र पर इंटरमीडिएट संस्कृत विषय का प्रश्नपत्र निर्धारित तिथि से लगभग 20 दिन पहले ही खोल दिया गया, जिसके बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।
यूपी बोर्ड परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक, आजमगढ़ केंद्र पर बड़ी लापरवाही
यूपी बोर्ड परीक्षा की गोपनीयता पर सवाल
यह चौंकाने वाला वाकया आजमगढ़ जिले के पल्हना क्षेत्र में स्थित मां शारदा इंटर कॉलेज, सिंहपुर सरैया का है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को ही केंद्र पर इंटरमीडिएट संस्कृत का प्रश्नपत्र नियमों को ताक पर रखकर खोल दिया गया था। इसके बाद केंद्र प्रबंधन की ओर से एक हैरान कर देने वाली रिपोर्ट भी भेजी गई, जिसमें दावा किया गया था कि परीक्षा में कोई भी छात्र उपस्थित नहीं हुआ। यह रिपोर्ट मिलते ही अधिकारियों को तुरंत संदेह हुआ और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
संदिग्ध रिपोर्ट मिलने के बाद यूपी बोर्ड के वाराणसी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के सचिव विनोद राय, सहायक शिक्षा निदेशक नवल किशोर और प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार बिना देरी किए तत्काल परीक्षा केंद्र पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सभी संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की और केंद्र के कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र व्यवस्थापक, स्टेटिक मजिस्ट्रेट और बाह्य केंद्र व्यवस्थापक ने नियमों का ठीक से पालन नहीं किया। अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि तय तारीख से पहले प्रश्नपत्र खोलना परीक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है, जो न केवल परीक्षा की गोपनीयता को भंग करता है बल्कि पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा कदाचार के मामलों को उजागर किया है।
जांच के दौरान अधिकारियों ने खुले हुए प्रश्नपत्र को दोबारा विधिवत सील कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखवाया। साथ ही, इस पूरे गंभीर प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर ने इसे ‘बेहद गंभीर मामला’ करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह रिपोर्ट अब उच्च अधिकारियों के पास अंतिम निर्णय और आगामी कार्यवाही के लिए भेजी जा रही है।
परीक्षा व्यवस्था पर लगाम की चुनौती
इस घटना ने प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूपी बोर्ड हर साल नकल और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए कड़े नियम और निर्देश जारी करता है, लेकिन इस तरह की लापरवाही से बोर्ड की छवि को भारी नुकसान पहुँचता है। अभिभावकों और छात्रों में भी परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर चिंता और अविश्वास बढ़ रहा है। प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर प्रभावी ढंग से लगाम लगानी होगी।
इसी बीच, अन्य जिलों से भी यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान नकल से जुड़ी कुछ और घटनाएं सामने आई हैं। शुक्रवार को अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से कुल पांच सॉल्वर पकड़े गए। इन सभी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के तहत त्वरित रूप से एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि नकल करने वालों और कराने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी और उन पर कानून के अनुसार कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रशासन की यह सख्ती परीक्षा कदाचार को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
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