
UP SI Recruitment: उत्तर प्रदेश में पुलिस उपनिरीक्षक (SI) और समकक्ष पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा के दौरान एक प्रश्न पर उठे विवाद ने राज्यभर में चर्चा का विषय बना दिया है। इस परीक्षा में लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा यह मामला अब जांच के दायरे में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
UP SI Recruitment: यूपी एसआई भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द पर विवाद, सरकार ने दिए जांच के आदेश
UP SI Recruitment परीक्षा में प्रश्न पत्र तैयारी की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) और समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को प्रदेश के 75 जिलों में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण परीक्षा में लगभग 4500 पदों के लिए 15 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। हालांकि, परीक्षा के पहले ही दिन, हिंदी खंड में पूछे गए एक प्रश्न ने गंभीर विवाद को जन्म दे दिया। प्रश्न था कि ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला कौन-सा व्यक्ति है?’ इसके विकल्पों में अवसरवादी, निष्कपट, सदाचारी और पंडित शामिल थे। इन विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर विभिन्न नेताओं और समाज के वर्गों द्वारा कड़ी आपत्ति जताई गई। इस मामले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के सम्मान को बनाए रखने के लिए पूरी तरह गंभीर है। ऐसे में यह जानना आवश्यक हो जाता है कि आखिर यूपी एसआई परीक्षा का प्रश्न पत्र कौन तैयार करता है, और इस पूरे परीक्षा पैटर्न में ऐसे विवादास्पद प्रश्न कैसे शामिल हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का पैनल तैयार करना
परीक्षा के विभिन्न विषयों के लिए विषय विशेषज्ञ, अनुभवी प्रोफेसर और अधिकारी मिलकर एक पैनल बनाते हैं। ये विशेषज्ञ ही प्रारंभिक प्रश्न बैंक तैयार करते हैं।
प्रश्नों की समीक्षा (मॉडरेशन)
विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों की समीक्षा एक मॉडरेशन कमेटी द्वारा की जाती है। यह कमेटी सुनिश्चित करती है कि प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप हों, उनकी भाषा स्पष्ट और त्रुटिहीन हो, प्रश्नों का कठिनाई स्तर (आसान, मध्यम, कठिन) संतुलित हो, और कोई भी प्रश्न विवादास्पद न हो।
अंतिम चयन और मुहर
सभी संभावित प्रश्न सेट तैयार होने के बाद, परीक्षा नियंत्रक या बोर्ड की उच्च स्तरीय समिति अंतिम प्रश्न पत्र का चयन करती है और उस पर आधिकारिक मुहर लगाती है।
सुरक्षा और प्रिंटिंग
चयनित प्रश्न पत्र को अत्यंत सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में मुद्रित किया जाता है और सीलबंद बॉक्स में रखा जाता है। परीक्षा केंद्रों तक ले जाने के दौरान भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का पालन किया जाता है।
गोपनीयता का पालन
परीक्षा से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को गोपनीयता की शपथ लेनी होती है। प्रश्न पत्र लीक होने की स्थिति में कड़ी कानूनी कार्रवाई और कारावास का प्रावधान है। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें
विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस विवादास्पद प्रश्न पर प्रदेश के कई प्रमुख नेताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस मामले की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस प्रश्न पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा का अपमान करने वाले शब्दों का किसी भी परीक्षा में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इस घटना ने परीक्षा संचालन की पारदर्शिता और प्रश्न पत्र निर्माण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच अपेक्षित है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




