UPSC: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, यूपीएससी हर साल लाखों उम्मीदवारों के सपनों को साकार करने का माध्यम बनती है। इन परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसी दिशा में आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), और भारतीय विदेश सेवा (IFS) जैसी सर्वोच्च सेवाओं के लिए हर साल अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं का आयोजन करता है। लाखों युवा इन परीक्षाओं में शामिल होकर देश सेवा का सपना देखते हैं। इन परीक्षाओं की शुचिता और सुरक्षा बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि केवल योग्य और सही उम्मीदवार ही इनमें सफल हो सकें। इसी उद्देश्य से, यूपीएससी ने अब अपने सभी परीक्षा केंद्रों पर फेस रिकॉग्निशन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि अब परीक्षा कक्ष में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों की चेहरे की पहचान की जाएगी, जो परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को एक नया आयाम देगा।
UPSC में फेस रिकॉग्निशन क्यों है जरूरी?
यूपीएससी प्रतिवर्ष विभिन्न महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं का संचालन करता है, जिनमें देशभर से लाखों प्रतिभागी शामिल होते हैं। अब तक उम्मीदवारों की पहचान मुख्यतः दस्तावेज़ों और आईडी कार्ड के माध्यम से की जाती थी। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि चेहरे की पहचान प्रणाली इस प्रक्रिया को और भी सुदृढ़ और सुरक्षित बनाएगी। इस पहल का प्राथमिक लक्ष्य सही उम्मीदवार की पहचान सुनिश्चित करना है, यानी यह सत्यापित करना कि परीक्षा में वही व्यक्ति उपस्थित हो जिसने आवेदन किया है। इसका एक प्रमुख लाभ धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है, ताकि किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर कोई और परीक्षा न दे सके। यह भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का विश्वास बनाए रखने में भी सहायक होगा। इसके अतिरिक्त, यह मैनुअल जांच को कम करके पहचान प्रक्रिया को अधिक स्वचालित और त्वरित बनाएगा, जिससे लंबी कतारों और मैनुअल सत्यापन में लगने वाले समय की बचत होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह फेस रिकॉग्निशन तकनीक पूर्णतया एआई-आधारित है और इसकी कार्यप्रणाली अत्यंत सरल है। जब किसी उम्मीदवार ने यूपीएससी परीक्षा के लिए आवेदन किया था, तो उसने अपनी एक फोटो अपलोड की थी। परीक्षा के दिन, प्रवेश द्वार पर लगे कैमरे के सामने उम्मीदवार को खड़ा होना होगा। सिस्टम तुरंत उस व्यक्ति की लाइव फोटो का मिलान आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो से करेगा। यदि दोनों तस्वीरें मेल खाती हैं, तो उम्मीदवार को परीक्षा कक्ष में प्रवेश की अनुमति मिल जाएगी। यह संपूर्ण प्रक्रिया मात्र 8-10 सेकंड में पूरी हो जाती है और इसमें किसी मैनुअल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली सामान्य परीक्षा-दिवस की परिस्थितियों में सुचारु रूप से कार्य करेगी और उम्मीदवारों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।
पायलट प्रोजेक्ट और सफल परीक्षण
यूपीएससी ने इस महत्वपूर्ण प्रणाली को पूर्ण रूप से लागू करने से पहले राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षाओं में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसका परीक्षण किया था। 14 सितंबर, 2025 को गुरुग्राम के कुछ चुनिंदा केंद्रों पर इसका सफल परीक्षण किया गया। इस पायलट टेस्ट में उम्मीदवारों की लाइव फोटो को उनके आवेदन के समय जमा की गई डिजिटल फोटो से मिलाया गया। सत्यापन प्रक्रिया में केवल 8-10 सेकंड का समय लगा। इस प्रयोग ने दर्शाया कि यह प्रणाली सुरक्षा और प्रवेश दोनों प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण सुधार ला सकती है। इस सफल परिणाम के बाद, आयोग ने इसे अपनी सभी भर्ती परीक्षाओं में लागू करने का निर्णय लिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
परीक्षा के दिन की तैयारी और महत्वपूर्ण बिंदु
चूंकि अब फेस रिकॉग्निशन प्रणाली अनिवार्य हो चुकी है, इसलिए उम्मीदवारों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना होगा।
- पंजीकरण के समय अपलोड की गई फोटो और वास्तविक चेहरे में काफी हद तक समानता होनी चाहिए।
- पहले की तरह, आईडी कार्ड और UPSC Admit Card जैसी आवश्यक चीजें अपने साथ अवश्य रखें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- प्रवेश बिंदु पर लगे कैमरे के सामने सही ढंग से खड़े होकर सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करें।
- परीक्षा केंद्र अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कैमरे और इंटरनेट कनेक्टिविटी सही स्थिति में हों ताकि प्रवेश में कोई अनावश्यक देरी न हो।
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