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यूपीएससी रिजल्ट: सिविल सेवा परीक्षा में झूठे दावों की पोल खुली, जानें पूरा मामला

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UPSC Result: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक है। हर साल इसके परिणाम आने के बाद सफल उम्मीदवारों की प्रेरणादायक कहानियां सामने आती हैं, लेकिन इस बार परीक्षा के नतीजों को लेकर कुछ ऐसे झूठे दावे सामने आए हैं, जिन्होंने विवाद खड़ा कर दिया है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक महिला ने सिविल सेवा परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था, लेकिन प्रशासनिक जांच में यह दावा सरासर गलत पाया गया। इससे पहले बिहार में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जहां एक महिला ने 301वीं रैंक मिलने का दावा किया था, जिसे बाद में आयोग ने फर्जी करार दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यूपीएससी रिजल्ट: सिविल सेवा परीक्षा में झूठे दावों की पोल खुली, जानें पूरा मामला

यूपीएससी रिजल्ट विवाद: बुलंदशहर और बिहार के मामले

सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली शिखा गौतम ने यह दावा किया कि उन्होंने 113वीं रैंक प्राप्त की है और उनका चयन आईएएस पद के लिए हुआ है। यह खबर आग की तरह फैली और स्थानीय स्तर पर उनकी “सफलता” की खूब चर्चा हुई। शिखा को चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की बेटी बताया गया, जिससे उनकी कहानी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कई जगहों पर उनका भव्य स्वागत किया गया, ढोल नगाड़ों के साथ उन्हें सम्मानित किया गया और मीडिया में भी “चपरासी की बेटी बनी आईएएस” जैसी सुर्खियां चलने लगीं।

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इसी बीच, दिल्ली की एक अन्य शिखा ने यह दावा किया कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 113वीं रैंक उनकी है। उन्होंने इस मामले को लेकर आयोग को ईमेल भेजकर स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की। इसके बाद यह मामला प्रशासन तक पहुंचा और मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।

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दिल्ली की शिखा की शिकायत के बाद यूपीएससी ने बुलंदशहर की जिलाधिकारी को इस पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने इस जांच का जिम्मा प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा, जिसके तहत सदर तहसीलदार मनोज रावत को शिखा गौतम के घर भेजकर तथ्यों की पड़ताल कराई गई। जांच के दौरान परिवार से संबंधित दस्तावेज़ और प्रमाण पत्र मांगे गए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, परिवार कोई भी पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका। बाद में परिवार ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए दिल्ली की शिखा के चयन को ही सही बताया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

स्थानीय प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया कि बुलंदशहर की शिखा गौतम यूपीएससी की मुख्य परीक्षा (मेन्स) भी उत्तीर्ण नहीं कर पाई थीं। इसी कारण उनका साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए चयन ही नहीं हुआ था। जांच में यह भी पाया गया कि उनके दस्तावेज़ों में नाम ‘शिखा गौतम’ नहीं, बल्कि ‘शिखा रानी’ लिखा हुआ है। इन तथ्यों के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 113वीं रैंक दिल्ली की रहने वाली शिखा को ही मिली है। दिल्ली की शिखा के चयन से जुड़े कई प्रमाण सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की शिखा फिलहाल हरियाणा में ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

पूर्व में सामने आए ऐसे ही मामले और आयोग की सतर्कता

इससे पहले बिहार में भी सिविल सेवा परीक्षा को लेकर इसी तरह का विवाद सामने आया था। बिहार के भोजपुर जिले की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने दावा किया था कि उन्हें यूपीएससी में 301वीं रैंक मिली है। लेकिन बाद में आयोग ने स्पष्टीकरण जारी कर बताया कि 301वीं रैंक उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह की है। जांच में यह भी सामने आया था कि बिहार की आकांक्षा के Admit Card के क्यूआर कोड में रोल नंबर अलग दिखाई दे रहा था। इसके बाद उनका दावा भी गलत साबित हुआ।

यह घटनाएं दर्शाती हैं कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में किसी भी तरह के झूठे दावे न केवल उम्मीदवारों को भ्रमित करते हैं, बल्कि परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हैं। ऐसे में आयोग और प्रशासन दोनों ही ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/education/ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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