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फ़रवरी, 13, 2026
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दिल्ली विश्वविद्यालय में Vande Mataram Guidelines का पालन, क्या हैं ये नए नियम?

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Vande Mataram Guidelines: दिल्ली विश्वविद्यालय में हाल ही में हुए एक विशेष आयोजन ने देश भर में लागू होने जा रहे नए नियम का स्पष्ट संकेत दिया है। केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के बाद पहली बार किसी बड़े सार्वजनिक मंच पर ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों का सामूहिक गायन किया गया, जो अब कई संस्थानों और आयोजनों के लिए अनिवार्य हो गया है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में Vande Mataram Guidelines का पालन, क्या हैं ये नए नियम?

क्या हैं Vande Mataram Guidelines?

दिल्ली विश्वविद्यालय के साहित्य उत्सव के उद्घाटन सत्र में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंदों का शानदार गायन हुआ। करीब 3 मिनट 10 सेकंड तक चले इस गायन ने कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बटोर लिया। मंच पर मौजूद कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह, संस्कृति परिषद के पदाधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। यह पहली बार था जब विश्वविद्यालय के किसी बड़े आयोजन में ‘वंदे मातरम्’ को उसके पूरे छह छंदों के साथ सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया गया, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर New Rules जारी किए थे। गृह मंत्रालय के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य रूप से गाया या बजाया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि गीत के पूरे छह छंद गाए जाएंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय ने साहित्य उत्सव में इन नए नियमों का पालन करते हुए पूरा गीत प्रस्तुत किया, जिससे यह साफ संकेत मिला कि अब इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा।

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लागू करने की डेडलाइन और इसका प्रभाव

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू माना जाएगा। यानी, जिस दिन से आदेश जारी हुआ है, उसी दिन से सभी सरकारी संस्थानों और कार्यक्रमों में इसे अपनाना होगा। स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सरकारी आयोजनों में अब ‘वंदे मातरम्’ के छह छंद गाना या बजाना अनिवार्य रहेगा। हालांकि, सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा। वहां पहले की तरह व्यवस्था बनी रहेगी। यह फैसला देशभर के छात्रों और सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है।

नए नियमों के तहत सरकारी कार्यक्रमों में पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ होगा और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाएगा। दोनों के दौरान सभी लोगों को खड़े होकर सम्मान देना होगा। राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्यक्रमों में भी यह गीत बजाया जाएगा। उनके आगमन, प्रस्थान और भाषण से पहले और बाद में भी इसका पालन किया जाएगा। पद्म पुरस्कार जैसे बड़े नागरिक सम्मान समारोहों में भी अब यह गीत अनिवार्य होगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व

‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत है। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में लिखा था और बाद में यह उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ। गीत में भारत माता की छवि को सम्मान के साथ प्रस्तुत किया गया है। 1937 में कांग्रेस ने इसके केवल पहले दो छंदों को आधिकारिक रूप से अपनाया था। कुछ छंदों में देवी रूप का उल्लेख होने के कारण उस समय सभी छह छंदों को नहीं अपनाया गया था। अब सरकार ने फैसला किया है कि गीत को उसके मूल रूप में, पूरे छह छंदों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। यह निर्णय देश की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/education/

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये New Rules अब देश भर में लागू होंगे।

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