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मार्च, 20, 2026
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विक्रम दोराईस्वामी होंगे चीन में भारत के नए Ambassador to China: जानिए उनका पूरा सफर और कूटनीतिक अनुभव

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Ambassador to China: भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, और ऐसे समय में जब भारत और चीन के रिश्ते नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, एक अनुभवी राजनयिक को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को अब चीन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है, यह खबर छात्रों और करियर के इच्छुक लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है।

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Ambassador to China

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विक्रम दोराईस्वामी होंगे चीन में भारत के नए Ambassador to China: जानिए उनका पूरा सफर और कूटनीतिक अनुभव

नए Ambassador to China विक्रम दोराईस्वामी का कूटनीतिक सफर

भारत और चीन के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों से काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। खासकर पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। ऐसे नाजुक मोड़ पर बीजिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला चेहरा बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। सरकार ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए विक्रम दोराईस्वामी जैसे अनुभवी अधिकारी पर भरोसा जताया है।

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विक्रम दोराईस्वामी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की है। उनकी पढ़ाई के दौरान ही उन्हें विभिन्न देशों के इतिहास और संस्कृति को समझने में गहरी रुचि थी। सरकारी सेवा में प्रवेश करने से पहले, उन्होंने कुछ समय के लिए पत्रकार के रूप में भी काम किया, जिससे उन्हें समाज और वैश्विक मुद्दों की गहरी समझ मिली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

विदेश सेवा में प्रवेश और महत्वपूर्ण पदभार

साल 1992 में विक्रम दोराईस्वामी ने प्रतिष्ठित भारतीय विदेश सेवा (IFS) में कदम रखा। नई दिल्ली में अपनी ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने कूटनीति के विभिन्न पहलुओं को गहराई से जाना। उनकी पहली बड़ी विदेशी पोस्टिंग 1994 में हांगकांग में हुई, जहाँ उन्होंने तीसरे सचिव के रूप में कार्य किया। इस शुरुआती दौर से ही उनका diplomatic career आकार लेने लगा था।

हांगकांग में रहते हुए, दोराईस्वामी ने चीनी भाषा सीखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने चीनी विश्वविद्यालय हांगकांग के भाषा केंद्र में गहन अध्ययन किया और चीनी भाषा पर शानदार पकड़ बनाई। यह कौशल उनके भविष्य के करियर के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ, खासकर चीन से जुड़े महत्वपूर्ण असाइनमेंट में। यह उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है।

बीजिंग और लंदन में अनुभव

दोराईस्वामी को 1996 में बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में तैनात किया गया था, जहाँ उन्होंने लगभग चार साल तक काम किया। इस अवधि में उन्हें चीन की राजनीतिक प्रणाली, सामाजिक ताने-बाने और कार्य संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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चीन जाने से पहले, विक्रम दोराईस्वामी यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त के रूप में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे थे। ब्रिटेन में उन्होंने भारत और यूके के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिससे उनके diplomatic career में एक और अहम पड़ाव जुड़ा। उनका व्यापक अनुभव और चीनी भाषा पर उनकी पकड़ उन्हें इस चुनौतीपूर्ण भूमिका के लिए एक आदर्श विकल्प बनाती है।

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उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भारत और चीन के संबंधों में सकारात्मक गति आएगी और संवाद का रास्ता खुलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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