

Annu Kapoor News: बॉलीवुड के वो मंझे हुए कलाकार, जिनकी आवाज़ में जादू है और अभिनय में गहराई, वो नाम जो सुनते ही दिलों में उतर जाता है – अनु कपूर! कल यानी 20 फरवरी को अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी ज़िंदगी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है, जहां ज़मीन से उठकर आसमान छूने का जज़्बा हर कदम पर नज़र आता है।
Annu Kapoor News: 419 रुपये से शुरू हुआ अनु कपूर का फ़िल्मी सफ़र, जानिए संघर्ष और सफलता की अनसुनी दास्तान
Annu Kapoor की ज़िंदगी का अनमोल ‘संघर्ष’ और भोपाल से मुंबई तक का सफ़र
भारतीय सिनेमा के बहुमुखी प्रतिभा के धनी अनु कपूर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक गायक, निर्देशक, रेडियो जॉकी और टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। लगभग चार दशकों से अधिक के अपने लंबे फ़िल्मी सफ़र में, उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में काम करके दर्शकों का दिल जीता है। उनकी अदाकारी ने ‘जॉली एलएलबी’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘शौकीन’, ‘विक्की डोनर’ और ‘धर्म संकट में’ जैसी फिल्मों को अमर कर दिया, जिससे उन्हें केवल पहचान ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों का असीम प्यार भी मिला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Annu Kapoor का जन्म 20 फरवरी 1956 को भोपाल में एक साधारण परिवार में हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि अभिनय की दुनिया में अपना जादू बिखेरने वाले अनु कपूर का सपना कभी एक्टर बनने का नहीं था। उनका ख्वाब तो आईएएस ऑफिसर बनने का था, लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वे सपनों की नगरी मुंबई आए, तो उनकी जेब में सिर्फ 419 रुपये और 25 पैसे थे। यह बात खुद अनु कपूर ने साल 2020 में एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए अपने प्रशंसकों के साथ साझा की थी, जो उनके शुरुआती दिनों के कठिन संघर्ष की कहानी बयां करता है।
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चाय बेची, पकौड़े तले और फिर मिली ‘मंडी’
एक इंटरव्यू में, अनु कपूर ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए बताया था कि अपना गुजारा करने के लिए उन्होंने चाय की दुकान पर काम किया और पकौड़े भी बेचे। जिंदगी में इतने उतार-चढ़ाव और मुश्किलों के बावजूद, उन्हें इस संघर्ष से कभी डर नहीं लगा, क्योंकि उनका मानना है कि किसी की मेहनत और उसकी खूबियां ज़्यादा समय तक छिपी नहीं रह सकतीं। यह उनका दृढ़ विश्वास ही था जिसने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी।
उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब उन्होंने एक नाटक में 70 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाया। इस दमदार अभिनय ने निर्देशक श्याम बेनेगल का ध्यान खींचा, जिसके बाद उन्हें साल 1983 की फिल्म ‘मंडी’ में पहला बड़ा मौका मिला। इस फिल्म में उनका किरदार भले ही छोटा था, लेकिन उनकी अदाकारी की जमकर तारीफ हुई और यहीं से उनके लिए अभिनय के दरवाज़े खुलते चले गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अनु कपूर के कुछ यादगार फ़िल्में:
- जॉली एलएलबी (Jolly LLB)
- ड्रीम गर्ल (Dream Girl)
- शौकीन (Shaukeen)
- विक्की डोनर (Vicky Donor)
- धर्म संकट में (Dharam Sankat Mein)
आज अनु कपूर हिंदी सिनेमा का एक ऐसा चमकता सितारा हैं, जिनकी आवाज़ और अभिनय हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है कि कैसे एक छोटे से शहर से निकलकर, सीमित संसाधनों के बावजूद, कोई अपने हुनर और कड़ी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बना सकता है।





