Bhay Show: भारतीय दर्शकों के बीच इन दिनों एक ऐसा शो धूम मचा रहा है जिसने हॉरर के प्रति बनी पुरानी धारणाओं को तोड़ दिया है। रोंगटे खड़े कर देने वाला यह शो केवल डराता नहीं, बल्कि समझाता है कि डर क्या है और उसका अस्तित्व कितना गहरा है। मेकर्स का मानना है कि पैरानॉर्मल को समझने के लिए डर से ज़्यादा जानना ज़रूरी है। ‘जब तक जानोगे नहीं, तो मानोगे कैसे?’ की टैगलाइन के साथ आया यह शो दर्शकों से खूब प्यार बटोर रहा है, जो यह साबित करता है कि भारतीय ऑडियंस को हॉरर और पैरानॉर्मल जॉनर में गहरी दिलचस्पी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bhay Show: हॉरर का नया चेहरा, दर्शकों के बीच मचा रहा है धमाल, जानें क्यों है इतना खास
Bhay Show ने कैसे बदली हॉरर की परिभाषा?
मेकर्स के अनुसार, भारतीय सिनेमा ने लंबे समय तक वास्तविक हॉरर को सही तरह से एक्सप्लोर नहीं किया है। ज़्यादातर कंटेंट या तो बहुत ज़्यादा बनावटी रहा है या फिर ज़रूरत से ज़्यादा काल्पनिक। लेकिन, यह शो गौरव तिवारी की सच्ची कहानी पर आधारित है और पैरानॉर्मल को एक वास्तविक, खोजी नज़रिए से दिखाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह भारत का पहला ऐसा पैरानॉर्मल थ्रिलर है जो सिर्फ डर दिखाने से ज़्यादा, उस दुनिया के अस्तित्व और इंसानों के साथ उसके संबंध को समझाने की कोशिश करता है। शो में दिखाई गई कई खोजी लोकेशन्स वास्तविक हैं और इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी से जुड़े लोगों के अनुभवों से प्रेरित हैं।
दर्शकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया और सीज़न 2 की मांग
दर्शकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया से पूरी टीम बेहद खुश है। सोशल मीडिया पर लगातार इसके अगले सीज़न, यानी सीज़न 2 की मांग हो रही है। फैंस यह जानने के लिए बेताब हैं कि क्या यह रहस्यमयी यात्रा आगे भी जारी रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
फिलहाल अगले सीज़न 2 को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन अगर दर्शकों का प्यार यूं ही बना रहा, तो इसका आना तय माना जा सकता है। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
मुख्य बातें
- टैगलाइन: “जब तक जानोगे नहीं, तो मानोगे कैसे?”
- आधार: गौरव तिवारी की सच्ची कहानी और इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी के अनुभव।
- अद्वितीयता: भारत का पहला वास्तविक खोजी पैरानॉर्मल थ्रिलर।
- दर्शकों का प्यार: सोशल मीडिया पर लगातार सीज़न 2 की डिमांड।
- मकसद: सिर्फ डराना नहीं, बल्कि पैरानॉर्मल दुनिया को समझना।




