
Controversial Films 2025: साल 2025 हिंदी सिनेमा के लिए एक ऐसा साल रहा, जहां परदे पर कहानियों ने दर्शकों को खूब लुभाया, लेकिन कुछ ऐसी फिल्में भी रहीं जिन्होंने रिलीज से पहले ही बवाल मचा दिया। इन फिल्मों ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में भी खूब सुर्खियां बटोरीं और दर्शकों की उत्सुकता को आसमान पर पहुंचा दिया।
Controversial Films 2025: साल 2025 की वो फिल्में, जिन्होंने मचाया कोहराम!
Controversial Films 2025: बीते साल 2025 में, भारतीय सिनेमा ने सिर्फ मनोरंजन का ही नहीं, बल्कि कई बड़े विवादों का भी सामना किया। कुछ फिल्मों को उनके नाम, कहानी के प्लॉट या फिर किसी विशेष दृश्य के चलते गहन आलोचना का शिकार होना पड़ा। इन फिल्मों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन हुए, कानूनी नोटिस भेजे गए और सोशल मीडिया पर एक लंबी बहस छिड़ गई। इन विवादों ने सिर्फ फिल्म निर्माताओं को ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आम दर्शकों को भी दो खेमों में बांट दिया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Controversial Films 2025: साल की सबसे बड़ी बहस का केंद्र बनीं फिल्में
साल 2025 में, कई फिल्मों को लेकर विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। इनमें से दो प्रमुख फिल्में रहीं ‘छावा’ और ‘धुरंधर’, जिन्होंने अपनी रिलीज से पहले और बाद में भी खूब हंगामा मचाया। इन फिल्मों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने, ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने और समाज में गलत संदेश फैलाने जैसे आरोप लगाए गए।
‘छावा’ फिल्म, जिसके निर्देशक और मुख्य कलाकार ने दावा किया था कि यह एक ऐतिहासिक गाथा है, लेकिन कुछ समुदायों और इतिहासकारों ने इसकी कहानी पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है, जिससे एक विशेष समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। इस फिल्म के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए और इसकी रिलीज रोकने की मांग भी उठाई गई।
वहीं दूसरी ओर, ‘धुरंधर’ ने अपनी बोल्ड थीम और कुछ संवादों को लेकर खूब चर्चा बटोरी। इस फिल्म पर आरोप लगे कि यह समाज में गलत संदेश फैला रही है और इसमें आपत्तिजनक दृश्यों की भरमार है। फिल्म के मेकर्स ने सफाई दी कि उनकी मंशा सिर्फ एक सामाजिक मुद्दे को उजागर करना था, लेकिन जनता की राय बंटी हुई नजर आई। पब्लिक रिएक्शन इतना तीखा था कि सेंसर बोर्ड को भी इसमें दखल देना पड़ा।
‘छावा’ और ‘धुरंधर’ पर क्यों मचा हंगामा?
‘छावा’ के मामले में, विवाद का मुख्य कारण इतिहास की व्याख्या से जुड़ा था। फिल्म में कुछ ऐसे किरदार और घटनाओं को दिखाया गया, जिन पर इतिहासकारों के बीच एकमत नहीं था। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया, तो कुछ ने इसे ऐतिहासिक विकृति। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बहस केवल फिल्म प्रेमियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी इसने जोर पकड़ा।
‘धुरंधर’ के लिए विवाद की जड़ उसकी कथित अश्लीलता और नैतिक मूल्यों के हनन से जुड़ी थी। कई सामाजिक संगठनों ने इस फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किए। फिल्म के ट्रेलर्स और गानों ने भी पहले ही आग में घी डालने का काम किया था। पब्लिक रिएक्शन की वजह से फिल्म की कमाई पर भी असर पड़ा था।
दर्शकों की राय और सोशल मीडिया का शोर
इन दोनों ही फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब मीम्स बने और ट्रेंड्स चले। ट्विटर (अब X) पर ‘बायकॉट छावा’ और ‘स्टॉप धुरंधर’ जैसे हैशटैग घंटों तक टॉप पर बने रहे। हालांकि, इन विवादों के बावजूद कुछ लोगों ने इन फिल्मों को देखने की वकालत भी की और कहा कि कला को सेंसर नहीं किया जाना चाहिए। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
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कुल मिलाकर, साल 2025 को उन फिल्मों के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं दिया, बल्कि समाज में एक बड़ी बहस भी छेड़ दी। ‘छावा’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि सिनेमा सिर्फ कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का आईना भी है, जो कभी-कभी तीखे सवालों को भी जन्म देता है।





