Govinda News: बॉलीवुड के ‘हीरो नंबर 1’ गोविंदा की जिंदगी का एक ऐसा पहलू जो शायद ही आपने सुना हो। फर्श से अर्श तक का उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है, खासकर मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोकल ट्रेन के वो दिन, जब एक मां अपने जवान बेटे को भी बच्चा ही समझती थी।
गोविंदा न्यूज़: जब मुंबई की लोकल ट्रेन में गिरे ‘हीरो नंबर 1’, मां चिल्ला उठीं ‘मेरा बच्चा, मेरा बच्चा!’
बॉलीवुड के सुपरस्टार गोविंदा ने इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए न जाने कितने संघर्षों का सामना किया है। एक पुरानी बातचीत में, उन्होंने अपने शुरुआती दिनों का एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाला किस्सा साझा किया था। यह कहानी मुंबई की धड़कन कही जाने वाली लोकल ट्रेन से जुड़ी है, जहां उन्होंने आम आदमी की तरह सफर करते हुए इस शहर की असली रूह को करीब से महसूस किया।
गोविंदा न्यूज़: लोकल ट्रेन का वो रोमांचक अनुभव जिसने बदल दी जिंदगी
लहरें टीवी को दिए एक इंटरव्यू में गोविंदा ने याद करते हुए बताया था, “अपने करियर की शुरुआत में, मैंने आम मुंबईकर की तरह ही लोकल ट्रेन में सफर किया। यह शहर की पहचान है। एक बार, मैं पहली बार चर्चगेट गया था और भीड़ से खचाखच भरी ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। उस वक्त मेरी उम्र लगभग 18 या 19 साल की होगी, और मैं काफी फिट था। फुटबॉल खेलने और कसरत करने का मुझे बहुत शौक था।”
उन्होंने आगे बताया, “चर्चगेट का अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था। पहले मैं अपने भाइयों के साथ गया और फिर एक दिन अपनी मां को भी साथ लेकर पहुंचा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लेकिन, लोकल ट्रेन की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि ट्रेन में चढ़ते वक्त मेरा संतुलन बिगड़ गया और मैं गिर पड़ा। मेरे लिए तो यह सामान्य बात थी, लेकिन मेरी मां के लिए यह बेहद डरावना था। जैसे ही मैं गिरा, मां घबरा गईं और जोर-जोर से मदद के लिए चिल्लाने लगीं, ‘मेरा बच्चा! मेरा बच्चा!'”
गोविंदा मुस्कुराते हुए आगे कहते हैं, “यह सुनकर स्टेशन पर मौजूद लोग घबरा गए और इधर-उधर देखने लगे। उन्हें लगा कि कोई छोटा बच्चा खो गया है या गिर गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जब लोगों ने पीछे मुड़कर देखा, तो पाया कि गिरने वाला कोई छोटा बच्चा नहीं, बल्कि एक लंबा-चौड़ा, मजबूत जवान लड़का है। भले ही मैं जवान था, लेकिन मां के लिए मैं हमेशा उनका छोटा बच्चा ही रहूंगा। यह मुंबई की लोकल ट्रेन की भीड़ का कमाल था कि एक पल में इतना ड्रामा हो गया।”
विरार से मुंबई तक का सफर और माँ का प्यार
इस बातचीत के दौरान गोविंदा ने अपनी जिंदगी के सफर पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया, “विरार से मुंबई और फिर आगे का यह सफर करीब 21 सालों का रहा। मैं 21 साल तक विरार में ही रहा। गांव में सभी लोग जानते थे कि मैं अपनी मां के बहुत करीब हूं। मेरी मां मुझसे रोजाना घर का काम करवाती थीं और मैं बिना किसी शिकायत के हर काम करता था। गांव के लोग मजाक में कहा करते थे कि मां मुझे बेटे की बजाय बहू की तरह रखती हैं।”
अपने फिल्मी करियर की शुरुआत के बारे में गोविंदा ने कहा, “उस उम्र में मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक दिन अभिनेता बनूंगा। मैं एक छोटे शहर में पढ़ाई कर रहा था और मुझे डांस का बहुत शौक था। जब मैं मुंबई आया, तो यहां संघर्ष शुरू हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लेकिन किस्मत ने मेरा साथ दिया और महज दो से तीन महीनों के भीतर ही मुझे पहली फिल्म मिल गई। यहीं से मेरे अभिनय करियर की शानदार शुरुआत हुई।” मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
उन्होंने आखिर में कहा, “जब मैं पहली बार हीरो बना, तो जो खुशी महसूस हुई, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। आज इतने सालों बाद भी जब मैं अपने शुरुआती संघर्ष और लोकल ट्रेन के उन दिनों को याद करता हूं, तो वह दौर मुझे अपने जीवन का सबसे खूबसूरत मोड़ लगता है। वह अनुभव मुझे हमेशा जमीन से जोड़े रखता है।”






