

Khan Sir News: कपिल शर्मा के शो में जब खान सर ने अपने संघर्ष की दास्तान सुनाई तो हर कोई भावुक हो उठा। 107 करोड़ रुपये के नौकरी के ऑफर को ठुकरा देने वाले खान सर ने हाल ही में अपने इस फैसले की वजह बताई, जिसे सुनकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि कैसे एक शिक्षक ने पैसों से ऊपर छात्रों का भविष्य चुना।
खान सर ने क्यों ठुकराया 107 करोड़ का ऑफर?
लोकप्रिय कॉमेडियन कपिल शर्मा का शो ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शर्मा शो’ हमेशा से ही दर्शकों का मनोरंजन करता आया है। इस शो में हर हफ्ते कोई न कोई बड़ी हस्ती अपनी मौजूदगी से चार चांद लगाती है। हाल ही में, शो के एक विशेष एपिसोड में शिक्षा जगत की तीन दिग्गज हस्तियां – फिजिक्स वाला के सीईओ अलख पांडे, मोशन कोटा के सीईओ नितिन विजय और सबके चहेते खान सर नजर आए। यह एपिसोड शिक्षा के महत्व और शिक्षकों के त्याग को उजागर करता हुआ एक प्रेरणादायक मंच बन गया।
शो में कपिल शर्मा ने खान सर से 107 करोड़ रुपये के उस चौंकाने वाले नौकरी के प्रस्ताव को ठुकराने की वजह पूछी, जिसने सभी को हैरान कर दिया था। खान सर ने बड़ी सादगी से अपने अतीत के उन दिनों को याद किया जब वे खुद एक छात्र थे। उन्होंने बताया कि किस तरह आर्थिक तंगी के कारण उन्हें और उनके जैसे लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
संघर्ष से सफलता तक Khan Sir का सफर
खान सर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया, “जब हम छात्र थे, तो हमारा सपना होता था कि हम अलग-अलग जगहों पर पढ़ने के लिए यात्रा करें, खासकर कोटा जैसी जगहों पर। लेकिन तब हमारे पास इतने पैसे नहीं होते थे। आज भी 90 प्रतिशत से अधिक छात्र आरक्षित ट्रेन टिकट नहीं खरीद सकते। हम ट्रेन के दरवाजे पर खड़े रहते थे, अंदर जाने की हिम्मत नहीं करते थे, सिर्फ इस डर से कि कहीं 400 रुपये का जुर्माना न लग जाए, इसलिए हम दरवाजे पर ही बैठे रहते थे।”
उन्होंने महंगे कोचिंग सेंटरों की फीस पर भी प्रकाश डाला, जहां शिक्षकों का चेहरा देखने के लिए भी लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। खान सर ने बताया:
- **महंगे कोचिंग का बोझ:** वे शिक्षक का चेहरा देखने के लिए ही 1 लाख रुपये लेते थे।
- **ऑनलाइन शिक्षा का अभाव:** पहले ऑनलाइन पढ़ाई थी ही नहीं, इसलिए क्लासेज में उपस्थित होने के लिए छात्रों को लगभग 2 लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे।
- **गरीब छात्रों का दर्द:** ऐसे में मेरे जैसे गरीब छात्र इतनी महंगी शिक्षा का खर्च कैसे उठा सकते थे?
इस तरह के अनुभव ने खान सर के मन में एक गहरा प्रभाव छोड़ा और उन्होंने ठान लिया कि अगर उन्हें कभी मौका मिला, तो वे शिक्षा को हर छात्र की पहुँच में लाएंगे, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।
जब मुझे मौका मिला, तो मैं उन दिनों और अपने पैरों पर लगे जख्मों को नहीं भूला था। मैं जानता था कि ऐसे छात्र हमेशा रहेंगे जो इसी संघर्ष का सामना करेंगे, इसलिए मैंने तय किया कि अगर मुझे कभी मौका मिला, तो मैं वो रास्ता नहीं अपनाऊंगा। जब रावण का साम्राज्य टिक नहीं सका, तो 107 करोड़ रुपये क्या मायने रखते हैं। दरअसल, जो हमें 107 करोड़ रुपये दे रहा था, उसकी कंपनी अब बंद हो चुकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिक्षा का असली मोल: पैसों से कहीं ऊपर
अर्चना पूरन सिंह ने उत्सुकता से पूछा कि उन्हें इतनी बड़ी फीस क्यों मिल रही थी। इस पर खान सर ने समझाया कि वे चाहते थे कि मैं उनके साथ जुड़ूं और उनकी फीस बढ़ा दूं। यह तो तुरंत हो जाता। दरअसल, ये महंगे संस्थान कहते हैं, ‘वे कम फीस लेते हैं क्योंकि यही उनका स्तर है। अगर आपको प्रीमियम शिक्षा चाहिए, तो आपको प्रीमियम फीस चुकानी होगी।’ खान सर के इन शब्दों ने शिक्षा के व्यवसायीकरण और उसके नैतिक पहलुओं पर एक गहरा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने दिखाया कि कैसे कुछ लोग शिक्षा को सिर्फ कमाई का जरिया मानते हैं, जबकि असली शिक्षक छात्रों के भविष्य को अपनी प्राथमिकता समझते हैं।
खान सर की यह कहानी सिर्फ एक नौकरी के प्रस्ताव को ठुकराने की नहीं, बल्कि एक ऐसे आदर्श की है जो शिक्षा को एक पवित्र मिशन मानता है। यह उन सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणा है जो अपने छात्रों के लिए अथक प्रयास करते हैं और उन्हें उज्जवल भविष्य की राह दिखाते हैं। उनकी यह दास्तान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, जिससे लोग भावुक और प्रेरित हो रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

