Masoom Sharma News: हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री के बेताज बादशाह मासूम शर्मा के करियर पर एक समय ऐसा भी आया था, जब उनकी जुबां पर ताला लगने वाला था। सरकार के एक सख्त फैसले ने ना सिर्फ उनके बल्कि कई अन्य कलाकारों के संगीत सफर को भी झकझोर कर दिया था। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में मासूम शर्मा ने खुद इस चौंकाने वाली घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब सरकार ने कई गानों पर पाबंदी लगा दी थी। इस पाबंदी की जद में मासूम शर्मा सहित कई अन्य प्रसिद्ध कलाकारों के गाने भी आ गए थे। सरकार की तरफ से यह तर्क दिया गया कि इन गानों में हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री है, और इंडस्ट्री के कुछ लोग ऐसे गानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसी कारणवश कानून को हस्तक्षेप करना पड़ा और तीन से चार गानों को डिलीट कर दिया गया।
Masoom Sharma पर क्यों आई बैन की गाज?
इस प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर मासूम शर्मा के करियर पर पड़ा, क्योंकि उनके गानों की संख्या सबसे अधिक थी जिन पर कार्रवाई हुई थी। कलाकार ने इस बारे में बताया कि यह पूरी तरह से सरकार की नीति का हिस्सा था और उन्हें खुद भी इस फैसले के पीछे की पूरी जानकारी नहीं थी कि आखिर किस आधार पर यह निर्णय लिया गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मासूम शर्मा हरियाणवी म्यूजिक के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक हैं, जिनके गाने रिलीज होते ही धमाल मचा देते हैं। उनके फैन्स हमेशा उनके नए प्रोजेक्ट्स का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर संगीत की दुनिया में सेंसरशिप और कला की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। हालांकि, इस कठिन दौर के बावजूद मासूम शर्मा ने अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी और आज भी उनके गाने लोगों की जुबान पर छाए रहते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटना दर्शाती है कि कलाकारों को अपनी रचनात्मकता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी ख्याल रखना होता है। भविष्य में ऐसे किसी भी प्रतिबंध से बचने के लिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, कलाकारों और सरकार के बीच संवाद और सहयोग महत्वपूर्ण है।
संगीत और समाज: एक ज़रूरी संतुलन
यह घटना संगीत उद्योग में एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है – कलात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन। जहां कलाकार अपनी भावनाओं और रचनात्मकता को व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, वहीं उनके काम का समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार का यह कदम भले ही कुछ कलाकारों के लिए मुश्किल रहा हो, लेकिन इसका उद्देश्य समाज में गलत संदेश को फैलने से रोकना था।




