

Naseeruddin Shah News: बॉलीवुड के वेटरन एक्टर नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर सुर्खियों में छा गए हैं, और इस बार वजह उनका कोई नया प्रोजेक्ट नहीं बल्कि एक हैरान कर देने वाला दावा है जिसने मनोरंजन जगत में हलचल मचा दी है।
नसीरुद्दीन शाह ने खोली मुंबई यूनिवर्सिटी की पोल, कहा- “मुझे बुलाया फिर आने से रोका”
जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्हें मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित ‘जश्न-ए-उर्दू इवेंट’ में आमंत्रित किया गया था, जहां उन्हें छात्रों से बातचीत करनी थी। एक्टर इस आयोजन को लेकर बेहद उत्साहित थे, क्योंकि उनका शिक्षण और उभरते हुए कलाकारों को सलाह देने से चार दशक पुराना जुड़ाव रहा है। हालांकि, 31 जनवरी की रात को उन्हें बताया गया कि उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होना है। यह वाकया न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि कई सवाल भी खड़े कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नसीरुद्दीन शाह को आखिर क्यों किया गया दरकिनार?
इस घटना के बाद, नसीरुद्दीन शाह पर यह गलत इल्जाम भी लगाया गया कि उन्होंने खुद ही इस कार्यक्रम में आने से मना कर दिया था। एक्टर ने बताया कि इसके लिए उनसे कोई माफी तक नहीं मांगी गई, जो उन्हें और ज्यादा खला। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने कॉलम में इस पूरे मामले पर अपनी नाराजगी और सच्चाई को बयां किया। उनका मानना है कि उनकी बेबाक राय और किसी भी मुद्दे पर स्पष्ट विचार रखने की आदत के कारण ही उनका निमंत्रण रद्द किया गया है। यह पूरा प्रकरण एक बड़ी controversy का रूप ले चुका है।
नसीरुद्दीन शाह ने अपने कॉलम में बेबाकी से लिखा, “मैंने कभी भी खुद को ‘विश्वगुरु’ कहने वालों की तारीफ नहीं की है। यहां तक कि वो जिस तरह से खुद को पेश करते हैं मैं उनकी आलोचना करता रहा हूं। उनका घमंड मुझे बुरा लगता है। पिछले 10 सालों में उनके किए गए किसी भी काम से मैं प्रभावित नहीं हुआ हूं। मैंने अक्सर सत्ताधारी सरकार के कई कामों की आलोचना की है। आगे भी करता रहूंगा।” यह साफ तौर पर दर्शाता है कि नसीरुद्दीन शाह अपनी आलोचनात्मक सोच और निडरता के लिए किसी से समझौता करने वाले नहीं हैं। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
एक कलाकार की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल
शाह का यह बयान सिर्फ एक इवेंट रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि यह देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी और कलाकरों के अधिकारों पर भी सवाल खड़े करता है। उनके कॉलम के आखिर में लिखी गई एक पंक्ति बेहद मार्मिक और विचारोत्तेजक थी, “ये वो देश नहीं है, जिसमें मैं बड़ा हुआ। जिसने मुझे प्यार करना सिखाया।” यह पंक्ति उनके दर्द और निराशा को उजागर करती है कि जिस देश में उन्होंने अपनी कला को संवारा और प्यार पाया, आज वहां उन्हें अपनी राय रखने पर इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। यह पूरी घटना निश्चित तौर पर आने वाले समय में बॉलीवुड और शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बनी रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। क्या यह घटना अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बढ़ते दबाव का संकेत है? यह सवाल कई लोगों के मन में उठ रहा है। इस पूरी controversy पर सोशल मीडिया पर भी काफी बहस छिड़ी हुई है।





