Neil Nitin Mukesh न्यूज़: बॉलीवुड में हीरो बनने का सपना लिए कई कलाकार आते हैं, लेकिन कुछ ही होते हैं जो विलेन बनकर इतिहास रच जाते हैं। नील नितिन मुकेश उन्हीं चंद सितारों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी खलनायकी से दर्शकों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया और साबित किया कि ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ जैसी कहावत उनके लिए नहीं बनी। आज अपनी दमदार और खौफ पैदा करने वाली एक्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले नील नितिन मुकेश ने हिंदी सिनेमा में विलेन के किरदारों से अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वो वजीर, गोलमाल अगेन और साहो जैसी फिल्मों में अपनी नकारात्मक भूमिकाओं से दर्शकों को हैरान कर चुके हैं। नील का जन्म 15 जनवरी 1982 को मुंबई में हुआ था। उनका असली नाम नील माथुर था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने पिता और दादा के नाम जोड़कर नील नितिन मुकेश रखा। यह नाम उनके परिवार की संगीत विरासत को सम्मान देने के लिए रखा गया था।
हीरो के तौर पर संघर्ष और शुरुआत
नील ने अपने अभिनय के सिनेमाई सफर की शुरुआत 2007 में श्रीराम राघवन की समीक्षकों द्वारा सराही गई थ्रिलर फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ से की थी। इस फिल्म में उनकी नियंत्रित और तीव्र अभिनय क्षमता को आलोचकों ने खूब सराहा और उन्हें एक होनहार नए सितारे के रूप में देखा गया। इसके बाद उन्होंने ‘आ देखें जरा’, ‘न्यूयॉर्क’, ‘लफंगे परिंदे’, ‘प्लेअर्स’ और ‘3G’ जैसी कई फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। हालांकि, उन्होंने लगातार मेहनत की और विभिन्न जॉनर की फिल्में कीं, लेकिन इस दौरान उन्हें बड़े स्तर की लोकप्रियता हासिल नहीं हो पाई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नील नितिन मुकेश: एक विलेन के तौर पर पहचान
नील के सिनेमाई सफर में एक बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने नकारात्मक किरदार निभाना शुरू किया। फिल्म ‘वजीर’ में उनका विलेन का रोल गेम-चेंजर साबित हुआ और उनकी डरावनी स्क्रीन प्रेजेंस को खूब सराहा गया। इसके बाद उन्होंने ‘गोलमाल अगेन’ और ‘साहो’ जैसी बड़ी फिल्मों में भी विलेन की भूमिकाएं निभाईं, जहां उनकी शानदार एक्टिंग और अप्रत्याशित अंदाज ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया। नील का यह बदलाव इतना असरदार था कि उनकी ऑन-स्क्रीन मौजूदगी ने दर्शकों में सचमुच डर और जिज्ञासा दोनों पैदा कर दी। बिना किसी अतिरिक्त ड्रामा के भी उनकी एक्टिंग सभी का ध्यान खींच लेती थी, जिससे वो नकारात्मक किरदारों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन गए। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
साउथ में भी दिखाया जलवा और सामाजिक कार्य
हिंदी सिनेमा के अलावा, नील ने अपनी एक्टिंग का दायरा साउथ फिल्मों तक भी बढ़ाया। इनमें तमिल ब्लॉकबस्टर ‘कैथी’ और तेलुगु फिल्म ‘कवचम’ शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स ने उन्हें एक बहुमुखी एक्टर के रूप में साबित किया, जो भाषा की सीमाओं को पार कर सकते हैं, और उनके विलेन वाले किरदारों ने उनके करियर को एक नई ऊर्जा भी दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अभिनय के अलावा, नील ने प्रोडक्शन में भी कदम रखा और ‘बायपास रोड’ फिल्म का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिका भी निभाई। स्क्रीन से दूर रहते हुए, वो सामाजिक कामों में भी सक्रिय रहे हैं। 2009 में उन्होंने एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) की स्थापना की, जिसका मकसद है जरूरतमंद महिलाओं को खाना, रहने की जगह और व्यावसायिक प्रशिक्षण देना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

