

Thappad Movie News: सिनेमाघरों में जब अनुभव सिन्हा की ‘थप्पड़’ रिलीज़ हुई, तो इसने एक ऐसे ज्वलंत मुद्दे को उठाया, जिस पर समाज में अक्सर पर्दा डाल दिया जाता है। तापसी पन्नू अभिनीत इस फिल्म ने ‘बस एक थप्पड़ ही तो था’ वाली मानसिकता को चुनौती दी और हर दर्शक को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसकी कहानी और दमदार संवाद आज भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं।
‘बस एक थप्पड़ ही तो था’: जब तापसी पन्नू की थप्पड़ मूवी ने हिला दी थी सोच की नींव
थप्पड़ मूवी: अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित और तापसी पन्नू अभिनीत ‘थप्पड़’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि यह भारतीय समाज के उस अनदेखे पहलू पर एक कड़ा प्रहार था, जहाँ महिलाओं पर होने वाली छोटी-बड़ी हिंसा को अक्सर ‘माफ कर देने’ की सलाह दी जाती है। इस फिल्म ने दिखाया कि सम्मान और आत्म-मूल्य किसी भी रिश्ते की रीढ़ होते हैं, और एक ‘थप्पड़’ भी रिश्ते की पूरी बुनियाद हिला सकता है। फिल्म में ऐसे कई पल और संवाद थे, जिन्होंने दर्शकों की आत्मा तक को झकझोर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन मूवी डायलॉग्स ने न केवल कहानी को आगे बढ़ाया बल्कि समाज में एक गहरी बहस भी छेड़ दी।
तापसी पन्नू की थप्पड़ मूवी के वो सात यादगार डायलॉग्स
‘थप्पड़’ की कहानी जितनी मजबूत थी, उसके डायलॉग्स उतने ही प्रभावशाली थे। ये डायलॉग्स आज भी लोगों को रिश्तों, आत्मसम्मान और बराबरी के मायने समझाते हैं। आइए देखते हैं फिल्म के उन सात दमदार मूवी डायलॉग्स को, जिन्होंने दर्शकों के मन पर एक अमिट छाप छोड़ी:
- “मैं खुश नहीं हूं, अब मुझे खुश होना नहीं आता।” – यह डायलॉग दिखाता है कि कैसे एक महिला अपनी खुशी को नजरअंदाज कर के एक खोखले रिश्ते में जीती रहती है।
- “प्यार करो, इज्जत करो, अगर इज्जत नहीं कर सकते तो प्यार मत करो।” – रिश्तों में सम्मान की अहमियत को बताता यह डायलॉग आज भी प्रासंगिक है।
- “औरत को बस एक चादर में लपेटकर रखते हैं, ये नहीं सोचते कि चादर में लपेटने से पसीना आता है, बदबू आती है।” – यह पितृसत्तात्मक सोच पर एक तीखा प्रहार है।
- “क्या वो एक थप्पड़ था? नहीं, वो नहीं मार सकता।” – इस संवाद ने लाखों महिलाओं की उस चुप्पी को आवाज दी, जो हिंसा को सिर्फ ‘एक बार’ कहकर टाल देती हैं।
- “क्यों नहीं बोलती हो? हर चीज बर्दाश्त क्यों करती हो?” – यह डायलॉग महिलाओं को अपने हक के लिए आवाज़ उठाने का संदेश देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- “जो शादी में थोड़ा एडजस्टमेंट होता है ना, वो दोनों तरफ से होता है।” – यह बराबरी के रिश्ते और आपसी सामंजस्य के महत्व पर जोर देता है।
- “अगर औरत को मार सकते हो, तो छोड़ भी सकते हो।” – यह डायलॉग बताता है कि हिंसा करने वाले को रिश्ते में रहने का कोई हक नहीं।
तापसी पन्नू और ‘थप्पड़’ का असर
तापसी पन्नू ने अमृता के किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया कि हर दर्शक उससे जुड़ाव महसूस कर पाया। उनकी सहज अदाकारी और इन दमदार संवादों ने फिल्म को एक नई ऊंचाई दी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भले ही बहुत बड़ी कमाई न की हो, लेकिन इसने एक सामाजिक संदेश दिया, जिसकी गूँज आज भी सुनाई देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सोशल मीडिया पर भी इन डायलॉग्स को लेकर खूब चर्चा हुई थी, जहां लोगों ने अपनी राय खुलकर रखी। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। ‘थप्पड़’ ने साबित किया कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को जगाने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है।

