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फ़रवरी, 11, 2026
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Bokaro में Child Marriage पर उपायुक्त अजय नाथ झा का बड़ा बयान – ‘बेटियां देश का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन’

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Child Marriage: बेटियां केवल विवाह के लिए नहीं बनी हैं, बल्कि वे देश का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन हैं। उनके जन्म को बोझ नहीं बल्कि उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए। जिस घर में बेटी का जन्म हो, वहां अवश्य जाएं, उपहार दें और गर्व के साथ कहें – बधाई हो, बेटी हुई है। यह बातें शुक्रवार को उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा ने सुरक्षित एवं सशक्त झारखंड के लिए आयोजित अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा।

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यह कार्यशाला सेक्टर-05 स्थित बोकारो स्टील सिटी के पुस्तकालय मैदान में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं एवं आमजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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Child Marriage मुक्त बोकारो बनाने का संकल्प

उपायुक्त ने कहा कि, बाल विवाह और डायन जैसी कुरीतियां समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं। इन्हें जड़ से समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक और सक्रिय होना होगा। उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति सोच में बदलाव लाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अपने वक्तव्य में राजा राम मोहन राय, सावित्री बाई फुले – फातिमा शेख द्वारा उठाए गए कदमों और कुप्रथा को इतिहास में शामिल होने की जानकारी दी। कहा कि बाल विवाह – डायन जैसी कुरीतियों को भी इतिहास बनाना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला का श्रृंगार, पहनावा और जीवनशैली उसकी अपनी अभिव्यक्ति है। इसे तय करने का अधिकार न पति को है, न बेटे को। पति के निधन के बाद भी कोई दूसरा यह निर्धारित नहीं कर सकता कि उसकी पत्नी कैसे रहे या कैसे दिखे। यह महिला की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है।

उन्होंने महिलाओं से अपनी चेतना में परिवर्तन लाने का आह्वान करते हुए कहा कि आप मजबूत हैं, स्वयं को अबला नहीं समझें। पुरुषों पर निर्भरता छोड़कर आत्मनिर्भर बनें और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता विकसित करें। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में बताया गया कि जिले का गोमिया प्रखंड बाल विवाह मुक्त प्रखंड बन चुका है। उपायुक्त ने संकल्प दिलाते हुए कहा कि अब लक्ष्य पूरे बोकारो जिले को बाल विवाह मुक्त बनाना है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ समाज में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ ली। डीसी ने सभी को बाल विवाह मुक्त समाज निर्माण का संकल्प दिलाया।

सामाजिक कुरीतियों पर जन जागरूकता की आवश्यकता

मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी ने कहा कि, बाल विवाह समाज की एक गंभीर समस्या है, जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव बेटियों के जीवन पर पड़ता है। बाल विवाह के कारण बेटियां शिक्षा से वंचित हो जाती हैं, उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है और उनका भविष्य असुरक्षित हो जाता है। इसे रोकने के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना जरूरी है। उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधि, सहिया, आंगनबाड़ी सेविका, स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण महिलाओं से आह्वान किया कि वह मिलकर लोगों को जागरूक करें, तो बाल विवाह जैसी कुप्रथा को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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मौके पर अपने संबोधन में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार ने कहा कि बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है। हमें प्रो-एक्टिव होकर अपने आसपास होने वाले बाल विवाह को रोकना होगा। यह केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी है कि इस कुप्रथा को समाप्त किया जाए। उन्होंने बताया कि अभी हर 05 विवाह में एक बाल विवाह हो रहा है, पूरे विश्व में भारत ऐसे मामलों में टॉपर है, इसे बॉटम से टॉपर श्रेणी में लाना है। इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए इच्छाशक्ति को जागृत करें, इस तरह के किसी भी मामले की सूचना तुरंत आंगनबाड़ी सेविका – सहायिका, बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, थाना प्रभारी, किसी भी सरकारी कर्मी को दें।

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कानूनी प्रावधान और सरकारी योजनाएं

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) सुमन गुप्ता ने बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने आमजनों से अपील की कि ऐसी किसी भी घटना की सूचना तुरंत डायल 112/100 अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें, ताकि समय रहते प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि प्रमंडल – जिला – प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर बाल विवाह निषेध पदाधिकारी घोषित है। उन्होंने बेटियों के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे पीएमएमवीवाई – सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना – मुख्यमंत्री कन्यादान योजना आदि की जानकारी दी, जो महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सामाजिक बदलाव केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जागरूकता से संभव है। बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर देकर ही एक सुरक्षित एवं सशक्त झारखंड का निर्माण किया जा सकता है। मौके पर प्रतिभागियों को सहायक निदेशक सुमन सिंह ने महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित कानूनों, सरकारी योजनाओं, सुरक्षा उपायों तथा शिकायत निवारण तंत्र की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध दृढ़ संकल्पित होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। जिम्मेवार नागरिक होने का परिचय देते हुए सशक्त समाज निर्माण में अपना योगदान देने को कहा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधीक्षक अतुल चौबे, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, डीपीएम जेएसएलपीएस, अनुमंडल क्षेत्र के मुखिया, पंचायत सचिव, संबंधित विभागों के पदाधिकारी, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की बच्चियां आदि उपस्थित रहीं।

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