



Legal Guardianship Certificate: दिव्यांग जनों के जीवन में कानूनी संरक्षण का छाता अब और मजबूत होगा, क्योंकि प्रशासन ने आवेदनों पर तेजी से कार्रवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण बैठक की है। बोकारो के गोपनीय कार्यालय कक्ष में गुरुवार को उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक नेशनल ट्रस्ट एक्ट, 1999 की धारा 13(1) के तहत दिव्यांगजनों को कानूनी संरक्षकता प्रमाण-पत्र जारी करने के उद्देश्य से लोकल लेवल कमेटी द्वारा आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी डॉ. सुमन गुप्ता और समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।
Legal Guardianship Certificate के लिए आवेदनों की हुई समीक्षा
बैठक का मुख्य एजेंडा नेशनल ट्रस्ट पोर्टल और ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त हुए कुल 06 आवेदनों पर गहनता से विचार-विमर्श करना था। समिति के सभी सदस्यों ने आवेदकों द्वारा जमा किए गए आवेदन पत्रों और संबंधित भौतिक दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जांच प्रक्रिया के दौरान, समिति ने पाया कि भौतिक सत्यापन के क्रम में 3 दिव्यांगजनों के अभिभावकों ने विभिन्न व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए लीगल गार्डियनशिप लेने से इनकार कर दिया। वहीं, बाकी 3 दिव्यांगजनों के मामलों में उनके अभिभावकों की उपस्थिति और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर समिति ने उन्हें कानूनी संरक्षकता देने का निर्णय लिया। इन आवेदनों में 5 ऑनलाइन और एक ऑफलाइन आवेदन शामिल था।

समिति ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया। यह निर्णय दिव्यांगजनों और उनके परिवारों को कानूनी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। नेशनल ट्रस्ट एक्ट के प्रावधानों के तहत यह प्रमाण-पत्र दिव्यांगजनों को उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा करने में मदद करता है।
डीसी ने दिए नियमित बैठक और पारदर्शिता के निर्देश
मामलों की समीक्षा के बाद उपायुक्त अजय नाथ झा ने जिला समाज कल्याण पदाधिकारी डॉ. सुमन गुप्ता को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति की बैठक हर तिमाही में नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए, ताकि लंबित मामलों का निपटारा समय पर हो सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पात्र लाभार्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी प्रक्रियाएं नेशनल ट्रस्ट एक्ट एवं अन्य संबंधित प्रावधानों के अनुरूप ही पूरी की जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि दिव्यांगजनों को समय पर कानूनी संरक्षकता प्रमाण-पत्र मिल सके और उन्हें किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके अतिरिक्त, उपायुक्त ने आशालता एवं मानव सेवा आश्रम से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए एक अलग से बैठक बुलाने का भी निर्देश दिया।

