



Mouth Cancer: मुंह में छिपा बैठा एक अदृश्य दुश्मन, जो मुस्कुराते हुए जिंदगियों को खामोश कर रहा है। इसी दुश्मन से लड़ने के लिए बोकारो के स्वास्थ्य महकमे ने एक बड़ी जंग छेड़ दी है, जिसके शुरुआती नतीजे हैरान करने वाले हैं। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर जिले में चलाए गए एक विशाल जांच अभियान ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
Mouth Cancer: जांच में सामने आए डराने वाले आंकड़े
सिविल सर्जन डॉ. अभय भूषण प्रसाद के कुशल निर्देशन में बुधवार को सदर अस्पताल समेत जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कैंसर जांच अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक के आंकड़े जारी किए गए, जो बेहद गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 1,45,275 लोगों के मुंह के कैंसर की जांच की गई, जिसमें से 276 व्यक्तियों में कैंसर के शुरुआती लक्षण पाए गए। इन सभी संदिग्ध मरीजों को आगे की जांच और इलाज के लिए उच्च केंद्रों पर रेफर कर दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
यह अभियान सिर्फ मुंह के कैंसर तक ही सीमित नहीं था। अभियान के दौरान 59,570 महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर की जांच की गई, जिसमें 140 महिलाओं में लक्षण मिले। इसके अलावा, 30,865 महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच हुई, जिसमें 132 महिलाएं संदिग्ध पाई गईं। इन सभी मामलों में तत्काल कार्रवाई करते हुए मरीजों को इलाज के लिए भेजा गया है।
क्या हैं मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण?
सदर अस्पताल के वरीय दंत चिकित्सक डॉ. संजय कुमार ने लोगों को आगाह करते हुए मुंह के कैंसर के लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “मुंह में लगातार दर्द रहना, ऐसा घाव जो भर न रहा हो, घाव से खून आना या मुंह के अंदर अथवा होंठों पर किसी तरह की कठोर गांठ महसूस होना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।” उन्होंने सलाह दी कि ऐसे कोई भी लक्षण महसूस होने पर व्यक्ति को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और तुरंत किसी विशेषज्ञ दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।इस विषय पर एनओएचपी के प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. निकेत चौधरी ने बताया कि पुरुष और महिलाएं, दोनों ही बराबर रूप से इसके शिकार हो सकते हैं। उन्होंने घर पर ही शुरुआती जांच का एक आसान तरीका सुझाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। डॉ. चौधरी के अनुसार, “आईने के सामने खड़े होकर अपने मुंह को अच्छी तरह खोलें और देखें कि कहीं होंठों, मसूड़ों, जीभ के नीचे या गालों के अंदर कोई सफेद धब्बा तो नहीं है। अगर ऐसा कुछ भी दिखे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।” इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कैंसर का सबसे बड़ा कारण: तम्बाकू और पान मसाला
जिला परामर्शी असलम ने इस बीमारी के मूल कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मुंह के कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे चबाने वाले तम्बाकू, खैनी और पान मसाला का सेवन एक मुख्य वजह है। इन नशीले पदार्थों का लगातार सेवन मुंह के अंदर की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचाता है, जो धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले लेता है। लोगों को इस जानलेवा लत से दूर रहने की सख्त जरूरत है। इस महत्वपूर्ण अभियान के दौरान उपाधीक्षक डॉ. एनपी सिंह, दंत स्वास्थ्य विज्ञानी संजय राम, डॉ. तुलिका सिंह समेत कई स्वास्थ्यकर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।




