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फ़रवरी, 11, 2026
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Bokaro News: प्रशासन के कड़े हस्तक्षेप से 307 मजदूरों को मिली ₹61.86 लाख की बकाया मजदूरी, न्याय का हुआ परचम बुलंद!

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Bokaro Labor News: जब न्याय की कलम चलती है, तो अन्याय के किले ढह जाते हैं। बोकारो में प्रशासन के एक त्वरित कदम ने 307 श्रमिकों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

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Bokaro Labor News: कैसे शुरू हुई शिकायत और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई?

बोकारो में एम/एस लक्ष्या पावरटेक प्रा. लि. के कर्मचारी संजय कुमार महतो और उनके चार सहकर्मियों ने प्रशासन के समक्ष एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत एम/एस लक्ष्या पावरटेक प्रा. लि. के खिलाफ थी, जो एम/एस इक्विनॉक्स इंजीनियरिंग लिमिटेड (ओएनजीसी लिमिटेड का प्रमुख ठेकेदार) की एक उप-ठेकेदार कंपनी है। श्रमिकों का आरोप था कि उन्हें उनकी देय मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा रहा था।

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शिकायत की गंभीरता को समझते हुए, जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन और शिकायतकर्ता श्रमिकों के साथ विस्तृत बैठकें आयोजित कीं। इन बैठकों के दौरान, सभी पक्षों को ध्यानपूर्वक सुना गया और तथ्यों की गहन समीक्षा की गई। प्रशासन ने सतत समझाइश, प्रभावी हस्तक्षेप और समन्वयात्मक प्रयासों के माध्यम से मामले को सुलझाने का रास्ता निकाला। इन अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप, श्रमिकों की लंबित मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सका। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  बोकारो में मैट्रिक-इंटर परीक्षा पर प्रशासन की पैनी नजर, DC-DDC ने केंद्रों पर मारा छापा, दिए सख्त निर्देश | Bokaro News

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सर्वप्रथम शिकायतकर्ता चार श्रमिकों को 1,44,470 रुपये की राशि का भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त, एम/एस लक्ष्या पावरटेक प्रा. लि. के 295 अन्य श्रमिकों को भी 57,82,111.50 रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह, कुल 307 श्रमिकों को 61,86,598.50 रुपये की कुल राशि का भुगतान सुनिश्चित हुआ। यह भी उल्लेखनीय है कि इस कुल राशि में पहले निपटाई जा चुकी दो शिकायतों के तहत किया गया भुगतान भी शामिल है, जो दर्शाता है कि प्रशासन देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। श्रमिक अधिकार की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय है।

लंबित मजदूरी का पूरा हिसाब: कितने श्रमिकों को कितना भुगतान?

प्रशासन के इस हस्तक्षेप से न केवल लंबित मजदूरी का भुगतान हुआ, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण संदेश भी गया कि श्रमिकों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुल 307 श्रमिकों के लिए 61 लाख 86 हजार 598 रुपये और 50 पैसे की यह राशि उनके लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। यह एक स्पष्ट उदाहरण है कि जब सरकारी तंत्र सक्रिय होता है, तो आम जनता को न्याय मिलने में देर नहीं लगती। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

प्रशासन की प्रतिबद्धता: श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा

श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (केंद्रीय) दुर्गा प्रसाद बारीक ने इस अवसर पर कहा कि श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर श्रमिकों के शोषण या मजदूरी भुगतान में लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा। भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी। यह सुनिश्चित करना कि हर श्रमिक अधिकार प्राप्त करे, प्रशासन का मुख्य लक्ष्य है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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