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फ़रवरी, 25, 2026
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Jharkhand Assembly में गूंजा मंत्री का आदेश, MLA हेमलाल मुर्मू ने पूछा- 180 दिन बाद भी टेंडर रद्द क्यों नहीं? बेटियों की शिक्षा पर भी घेरा

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Jharkhand Assembly: सदन की कार्यवाही जब सवालों की तपिश से गरमा जाए, तो समझिए लोकतंत्र की जड़ें गहरी हो रही हैं। झारखंड विधानसभा में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब लिट्टीपाड़ा के विधायक ने सरकार को आईना दिखाते हुए विभागीय प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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Jharkhand Assembly में टेंडर नियमों पर तीखे सवाल

झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान लिट्टीपाड़ा के विधायक हेमलाल मुर्मू ने ग्रामीण सड़कों से जुड़े टेंडरों का मुद्दा उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी निविदा का निष्पादन 180 दिनों के भीतर हो जाना चाहिए, लेकिन धरातल पर नियमों की अनदेखी हो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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विधायक ने सदन को बताया कि 8 दिसंबर को संबंधित विभाग के मंत्री ने ग्रामीण सड़कों के टेंडर को रद्द करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी वे टेंडर निरस्त नहीं हुए। यह स्थिति पूरी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। उन्होंने सवाल किया कि जब कई योजनाओं के लिए तकनीकी (Technical Bid) और वित्तीय (Financial Bid) बोलियां खोली जा चुकी हैं, तो मंत्री के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ? क्या मंत्री का आदेश टेंडर कमेटी और सक्षम प्राधिकार के लिए बाध्यकारी नहीं है?

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हेमलाल मुर्मू ने सरकार से पूछा कि प्रशासनिक व्यवस्था में सर्वोच्च शक्ति किसके पास है—मंत्री, टेंडर कमेटी या सक्षम प्राधिकार? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि 180 दिनों की समय सीमा समाप्त हो जाती है, तो निविदादाताओं से या तो वैधता बढ़ाने के लिए लिखित सहमति ली जानी चाहिए या निविदा को स्वतः रद्द मान लिया जाना चाहिए। लेकिन 2024-25 की कई निविदाएं मंत्री के आदेश के बाद भी लंबित हैं, जो प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

बेटियों की शिक्षा के लिए भी बुलंद की आवाज

प्रशासनिक सवालों के साथ-साथ विधायक हेमलाल मुर्मू ने अपने क्षेत्र की एक ज्वलंत सामाजिक जरूरत को भी सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र लिट्टीपाड़ा में एक भी महिला महाविद्यालय नहीं है। इस कारण ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों की बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मीलों दूर शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।

उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि दूरी, आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के चलते कई प्रतिभाशाली छात्राएं इंटरमीडिएट के बाद पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं। यह महिला सशक्तिकरण के मार्ग में एक बड़ी बाधा है। विधायक ने सरकार को जानकारी दी कि हिरणपुर प्रखंड में महिला महाविद्यालय के निर्माण के लिए पर्याप्त और उपयुक्त भूमि भी उपलब्ध है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए हिरणपुर में महिला महाविद्यालय की स्थापना को स्वीकृति दी जाए और निर्माण कार्य के लिए बजट का प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा, “बेटियों की शिक्षा ही क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की नींव है।” अब सदन से लेकर क्षेत्र की जनता तक, सभी की निगाहें सरकार के जवाब पर टिकी हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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