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Jharkhand Migrant Worker: झारखंड के प्रवासी मजदूर की सऊदी अरब में मौत, 120 दिन बाद लौटा शव, पढ़िए परिवार की बड़ी डिमांड

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Jharkhand Migrant Worker: ज़िंदगी की रोटी कमाने निकले एक नौजवान की कहानी, जो परदेस में जाकर मौत के मुंह में समा गया। एक ऐसा सफ़र जिसका अंत घर लौटकर अपनों के बीच होना था, लेकिन हुआ ताबूत में। यह कहानी है गिरिडीह के विजय कुमार महतो की, जिनका शव सऊदी अरब में एक दुखद सऊदी अरब घटना के बाद 120 दिन बाद भारत लौटा।

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झारखंड के प्रवासी मजदूर की सऊदी अरब में मौत: 120 दिन बाद लौटा शव, परिवार ने उठाई मुआवजे की मांग

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सऊदी अरब में झारखंड के प्रवासी मजदूर की मौत: 120 दिन बाद लौटा शव

झारखंड के गिरिडीह जिले के एक प्रवासी मजदूर की सऊदी अरब में अपराधियों और पुलिस के बीच हुई गोलीबारी में फंसने के बाद मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना के 120 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर भारत लौटा, जिससे उनके पैतृक गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक विजय कुमार महतो (27 वर्ष) सऊदी अरब में एक बिजली पारेषण परियोजना पर काम कर रहे थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार, 15 अक्टूबर को एक डिलीवरी असाइनमेंट के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच हुई गोलीबारी में उन्हें गोली लग गई, जिसके बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। महीनों के इंतजार के बाद, उनका शव आखिरकार रांची हवाई अड्डे पर पहुंचा, जिससे डुमरी ब्लॉक स्थित उनके गांव में मातम पसर गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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शुरुआत में, परिवार के सदस्यों ने शव लेने से इनकार कर दिया था। उनकी मांग थी कि नियोक्ता से मुआवजे और जवाबदेही के बारे में स्पष्टता मिले। उनकी पत्नी बसंती देवी ने बताया कि दंपति के दो छोटे बेटे हैं, जिनकी उम्र सात और पांच साल है, और अब उनके पास आय का कोई स्थिर स्रोत नहीं है। उन्होंने कहा कि विजय 2023 में एक निजी ठेकेदार के माध्यम से काम के लिए विदेश गए थे और 31 दिसंबर, 2024 को ड्यूटी पर लौटने से पहले एक बार घर वापस आ चुके थे।

परिवार का दर्द और मुआवजे की मांग

विजय के पिता सूर्य नारायण महतो ने बताया कि परिवार इन मुश्किलों से जूझ रहा है और उन्होंने सवाल उठाया कि उनके बच्चों और विकलांग पत्नी का भरण-पोषण कौन करेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस सऊदी अरब घटना के बाद नियोक्ता ने परिवार से कोई संपर्क नहीं किया, और उन्होंने शव स्वीकार करने से पहले उचित मुआवजे की मांग की है। यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उन हज़ारों परिवारों की कहानी है जो बेहतर जीवन की तलाश में अपनों को दूर भेजते हैं।

गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी प्रावधानों के तहत, मृतक प्रवासी कामगारों के परिवार आवेदन जमा करने पर 5 लाख रुपये की सहायता राशि के पात्र हैं। अधिकारियों ने आगे स्पष्ट किया कि नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला कोई भी मुआवजा यूएई वाणिज्य दूतावास और संबंधित कंपनी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

मुआवजे के सरकारी प्रावधान और विरोध प्रदर्शन

इस घटना ने ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं में गहरा आक्रोश भर दिया है। उनका कहना है कि झारखंड से कामगार अक्सर खाड़ी देशों में बुनियादी ढांचा और बिजली परियोजनाओं में रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं, क्योंकि उनके अपने राज्य में रोजगार के अवसरों की भारी कमी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मृतक के परिवार को पर्याप्त मुआवजा और सहायता सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ यह मुद्दा सिर्फ विजय के परिवार का नहीं, बल्कि उन सभी प्रवासी मजदूरों के अधिकारों और सुरक्षा का है जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपना घर-बार छोड़ कर परदेस जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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