

Model Code of Conduct: चुनाव का मैदान सज चुका है और अब आखिरी दौर के प्रचार पर ‘तीसरी आंख’ की नजर है। मतदान के ठीक पहले होने वाली विज्ञापनों की बौछार पर चुनाव आयोग ने ऐसा पहरा बिठाया है कि प्रत्याशियों के पसीने छूटना तय है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान दिवस और उससे ठीक एक दिन पहले किसी भी तरह के विज्ञापन जारी करने के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं।
क्या है Model Code of Conduct का नया फरमान?
बोकारो में एमसीएमसी कोषांग ने सभी नगर निगम और नगर परिषद प्रत्याशियों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि मतदान के दिन और उससे 24 घंटे पहले किसी भी प्रकार के विज्ञापन के लिए मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से पूर्व-प्रमाणन लेना अनिवार्य होगा। यह कदम निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और आदर्श आचार संहिता के प्रभावी अनुपालन के लिए उठाया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बिना प्रमाणन के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रकाशित या प्रसारित नहीं किया जा सकेगा।
एमसीएमसी कमेटी के सदस्य सचिव सह मीडिया कोषांग के नोडल पदाधिकारी रवि कुमार ने गुरुवार को इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस नियम का उद्देश्य चुनाव के अंतिम और सबसे संवेदनशील समय में किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार या आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को रोकना है।
विज्ञापन सर्टिफिकेशन के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य
प्रत्याशियों और उनके प्रतिनिधियों को विज्ञापन जारी करने से पहले कुछ प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना होगा, जो इस प्रकार हैं:
- सभी उम्मीदवारों को अपने प्रस्तावित विज्ञापन, चाहे वो वीडियो, ऑडियो, पोस्टर या सोशल मीडिया पोस्ट हों, निर्धारित प्रारूप में तीन दिन पहले एमसीएमसी कोषांग के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
- विज्ञापन की स्क्रिप्ट/कंटेंट की एक प्रति और उसके साथ एक अधिकृत आवेदन पत्र संलग्न करना भी आवश्यक है।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चलाए जाने वाले प्रायोजित या पेड विज्ञापन भी इसी प्रमाणन प्रक्रिया के दायरे में आएंगे।
- यह सुनिश्चित करना प्रत्याशी की जिम्मेदारी होगी कि विज्ञापन के प्रकाशन या प्रसारण से पहले प्रमाणन प्राप्त कर लिया गया हो।
नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई
आयोग ने साफ किया है कि बिना पूर्व-प्रमाणन के यदि कोई भी प्रचार सामग्री जारी की जाती है, तो इसे आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसे मामले में संबंधित प्रत्याशी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आयोग की यह सख्ती चुनाव के आखिरी 48 घंटों में मतदाताओं को प्रभावित करने की किसी भी अनुचित कोशिश पर लगाम लगाने के लिए है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी उम्मीदवारों को प्रचार के लिए एक समान और निष्पक्ष अवसर मिले।





