
पश्चिम बंगाल में विभिन्न आपराधिक घटनाओं में पुलिस की भूमिका पर पहले ही सवाल उठाए जा चुके हैं। ऐसे में माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने गैर जिम्मेदार पुलिस की तुलना कुत्तों से कर विवाद खड़ा कर दिया।
रविवार को उन्होंने उस विवाद को और बढ़ा दिया है। रविवार को रामपुरहाट में एक पार्टी की बैठक में उन्होंने कहा कि मैंने कुत्ते के साथ पुलिस की तुलना करके कुत्ते का अपमान किया है। सलीम की इस टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया।
दरअसल शनिवार को दक्षिण 24 परगना के बिष्णुपुर में उन्होंने कहा था कि पुलिस को तनख्वाह क्यों दिया जा रहा है? पुलिस का काम दलाली करना है। उससे अच्छा कई कुत्ते पाल लेना होता। कुत्तों को प्रशिक्षित किया जाता है। वे सूंघ सकते हैं और सही जगह पर जा सकते हैं।
इससे साफ हो जाएगा कि वारदात कहां हो रही है। कुछ एसपी को हटा कर और कुछ विदेशी कुत्तों को लाकर ट्रेनिंग दी जाए। सेलिम ने विभिन्न घटनाओं की जांच में पुलिस की दक्षता पर सवाल उठाया। जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया है।
इस बीच रविवार को वह रामपुरहाट पहुंचे थे। राज्य में राजनीतिक हत्याओं पर जिला समिति के सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे। मंच पर भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि मैं आमतौर पर किसी को बुरा नहीं कहता। बोलने पर खुद अच्छा नहीं लगता। हालांकि, मैंने कल कहा था कि पुलिस को तनख्वाह ना देकर कुत्ते पाले जाए। लेकिन अब मैं बोलता हूं मैंने ऐसा कहकर कुत्तों का अपमान किया है क्योंकि, अगर कुत्ते को प्रशिक्षित किया जाएगा, तो वे अपराधी को ढूंढ और पहचान सकेंगे। ना कि मुख्यमंत्री के सामने खड़े होकर यह पूछेंगे कि कौन-सा केस किस रास्ते पर सजाना है।
उनकी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने उपहास किया, “तोजो के कुत्ते के रूप में नेताजी का अपमान करने वालों से यही उम्मीद की जाती है। माकपा के समय में पुलिस गुलाम हो गई थी। क्या उन घटनाओं को भूल गए हैं?”





