
Naxal Surrender: बस्तर के जंगलों में जो कभी बारूद की गंध घुलती थी, अब वहां अमन की बयार बहने लगी है। लाल आतंक का किला दरक रहा है और भटके हुए कदम मुख्यधारा की ओर लौट रहे है।
Naxal Surrender: देश में सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर, लाल आतंक’ पर के 108 नक्सलियों ने डाले हथियार
Jagdalpur Naxal Surrender: 108 नक्सलियों ने छोड़ा आतंक का रास्ता, अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी का होगा खुलासा!
Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ में बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में आज 11 मार्च को 108 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ आत्मसमर्पण कर दिया है। सभी नक्सली दंडकारण्य इलाके में सक्रिय थे। बताया जा रहा है कि इन पर करोड़ों रुपए का इनाम भी घोषित है। आत्मसमर्पण करने वालों में महिला माओवादी भी शामिल हैं।
यह आत्मसमर्पण न केवल संख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके रणनीतिक मायने भी हैं। बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने जानकारी दी कि इन आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों की निशानदेही पर सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी की है। इन बरामद हथियारों और विस्फोटकों के जखीरे को भी कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बरामदगी बीजापुर समेत बस्तर रेंज के कई जिलों के जंगलों में छिपाकर रखी गई थी।
Chhattisgarh Naxal Surrender: ‘पूना मारगेम’ अभियान की बड़ी सफलता
बस्तर में सुरक्षाबलों का लगातार बढ़ता दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली संगठन की कमर तोड़ने में कामयाब हो रही है। पिछले दो वर्षों के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं, जब 2700 से अधिक नक्सली कैडरों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें कई बड़े इनामी नक्सली भी शामिल थे, जिनके सिर पर लाखों का इनाम घोषित था। शासन की पुनर्वास योजना के तहत इन भटके हुए लोगों को आर्थिक सहायता, आवास, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं, ताकि वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकें। यह बदलते बस्तर की तस्वीर है, जहां अब बंदूक नहीं, बल्कि विकास की बात हो रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से नक्सली संगठनों का नेटवर्क बुरी तरह ध्वस्त हुआ है और उनकी ताकत कमजोर पड़ गई है। ‘पूना मारगेम’ जैसी पहलों ने आम कैडरों को यह विश्वास दिलाया है कि हिंसा के रास्ते से बाहर एक बेहतर जिंदगी उनका इंतजार कर रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
हाल के वर्षों में हुए बड़े आत्मसमर्पण
पिछले कुछ समय में बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण की घटनाओं में तेजी आई है, जो बस्तर नक्सलवाद के खात्मे का संकेत है। इन घटनाओं ने नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व को भी हिलाकर रख दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हाल के कुछ बड़े आत्मसमर्पणों पर एक नजर:
- बीजापुर में 50 और 103 कैडरों के दो बड़े समूहों ने आत्मसमर्पण किया।
- दंतेवाड़ा में 71 नक्सली कैडरों ने एक साथ हथियार डाले।
- एक ऐतिहासिक घटना में, केंद्रीय समिति के सदस्य सतीश उर्फ रूपेश समेत 210 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक थी।
- सुकमा और नारायणपुर जिलों में भी 43 नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
- आज जगदलपुर में 108 कैडरों का आत्मसमर्पण इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि नक्सली विचारधारा अब अपनी पकड़ खो रही है और क्षेत्र में शांति और विकास का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।







