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West Bengal Politics: बंगाल में ओवैसी का सियासी दांव, TMC की बढ़ी टेंशन, क्या बदलेंगे चुनावी समीकरण?

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West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की सियासी बिसात पर एक नया मोहरा चला गया है, जो न सिर्फ खेल बदल सकता है बल्कि खिलाड़ियों की नींद भी उड़ा सकता है। एक ऐसा दांव, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है और आने वाले समय में इसके दूरगामी परिणाम दिखेंगे।

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राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं और इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन करके आगामी चुनावों में हिस्सा लेगी। इस गठबंधन ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की परेशानी को बढ़ा दिया है और राज्य में चुनावी माहौल को और भी रोमांचक बना दिया है।

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ओवैसी ने हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जहां गठबंधन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। हालांकि, फिलहाल सीटों के बंटवारे को लेकर कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों और हुमायूं कबीर के पिछले बयानों से संकेत मिलते हैं कि यह गठबंधन राज्य की अधिकांश विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा।

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West Bengal Politics: ओवैसी और कबीर का गठबंधन: एक नया सियासी समीकरण

चर्चा है कि एआईएमआईएम मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की चुनिंदा आठ से दस सीटों पर ध्यान केंद्रित करेगी। वहीं, राज्य की अन्य सीटों पर हुमायूं कबीर की पार्टी मोर्चा संभालेगी। ओवैसी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया, “असेंबली के इंतखाबादत होने जा रहे हैं और मजलिस इत्तहाद मुस्लिमीन ने यह फैसला लिया है कि मगरबी बंगाल में हुमायूं कबीर साहब की जो पार्टी है, उनके साथ मजलिस इत्तहादुल मुस्लिमीन एक अलायंस करेगी और मजलिस के उम्मीदवार उस अलायंस का हिस्सा बनकर हम मगरबी बंगाल के इलेक्शन में हिस्सा लेंगे।” उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “हमारी कोशिश यही है कि मजलिस इत्तहाद मुस्लिमीन को मजबूत किया जाए। हमारी आवाज को मजबूत किया जाए। हमारे नुमाइंदे मुल्क के कोने-कोने में कामयाब होकर बेबाक तरीके से ऐवान असेंबली में गरीब और मजलूम आवाम की आवाज को उठाएं।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

अपने भाषण के दौरान, ओवैसी ने सीधे तौर पर मतदाताओं की भावनाओं को छूने का प्रयास किया। उन्होंने जनता से एक भावुक अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे अपनी खुद की राजनीतिक शक्ति को पहचानें। उन्होंने कहा कि दशकों से वे दूसरों को मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट देते आए हैं, लेकिन उनके क्षेत्रों में बदहाली दूर नहीं हुई। उन्होंने एआईएमआईएम को मजबूत बनाने का आह्वान किया, ताकि उनकी आवाज विधानसभा में गूंज सके।

मुस्लिम वोट बैंक पर ओवैसी की नजर: क्या है रणनीति?

ओवैसी का यह आह्वान स्पष्ट रूप से स्वतंत्र नेतृत्व की विचारधारा पर आधारित है, जिसे वह बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक आजमा चुके हैं। उनका तर्क है कि अल्पसंख्यक समुदाय को केवल एक मुस्लिम वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है और चुनाव के बाद उन्हें हाशिए पर धकेल दिया जाता है। इस बार, उनकी रणनीति पश्चिम बंगाल के मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष में एकजुट करने की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पश्चिम बंगाल में दो चरणों यानी कि 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए यह गठबंधन एक ‘एक्स फैक्टर’ साबित हो सकता है। 2021 के चुनाव में एआईएमआईएम का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था, लेकिन इस बार स्थानीय नेता हुमायूं कबीर का साथ मिलने से जमीनी पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है। यदि ओवैसी मुस्लिम वोटों का 5 से 10% हिस्सा भी अपनी ओर खींचने में सफल रहते हैं, तो कई सीटों पर जीत-हार का अंतर नाटकीय रूप से बदल सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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हुमायूं कबीर का मानना है कि मुर्शिदाबाद में नई बाबरी मस्जिद के निर्माण का प्रस्ताव एक भावनात्मक मुद्दा है, और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श को गहराई से प्रभावित कर सकता है। उनका दावा है, “अगर हमारी पार्टी सरकार बनाती है, तो पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री बनेगा, लेकिन अगर हम सरकार नहीं भी बनाते हैं तो भी हमारे पास इतना संख्याबल होगा कि हमारे बिना कोई सरकार नहीं बन पाएगी।” उन्होंने मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी को ऐसी बातों की कोई परवाह नहीं है। ईद की नमाज के बाद कोलकाता के रेड रोड पर जमा हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने अपना एजेंडा तो आगे बढ़ाया ही, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपने निशाने पर ले लिया था। चुनावी रण में यह मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक साबित हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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