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मार्च, 6, 2026
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Assam Sukhoi Crash: असम में वायुसेना का सुखोई विमान दुर्घटनाग्रस्त, दो पायलट शहीद, जांच के आदेश

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Assam Sukhoi Crash: आसमान में उड़ान भरना, बादलों को चीरना और देश की सरहदों की हिफ़ाज़त करना, यह सिर्फ एक पेशा नहीं, जुनून है। लेकिन कभी-कभी यही जुनून एक दर्दनाक अंत लिख देता है, जब तकदीर का चक्र उल्टा घूम जाता है। असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भारतीय वायुसेना का एक उन्नत सुखोई तीस एमकेआई युद्धक विमान प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें दो जांबाज़ पायलटों ने अपनी जान गंवा दी।

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Assam Sukhoi Crash: असम में वायुसेना का सुखोई विमान दुर्घटनाग्रस्त, दो पायलट शहीद, जांच के आदेश

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Assam Sukhoi Crash: कैसे हुआ हादसा और क्या थी परिस्थितियां?

भारतीय वायुसेना ने पुष्टि की है कि इस दुखद हादसे में स्क्वॉड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह घटना तब हुई जब असम के जोरहाट स्थित वायुसेना अड्डे से गुरुवार शाम को एक दो सीट वाला सुखोई तीस एमकेआई युद्धक विमान प्रशिक्षण अभियान के लिए उड़ान पर था। जोरहाट को पूर्वोत्तर भारत में वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण अग्रिम अड्डों में से एक माना जाता है, जो सामरिक रूप से बेहद अहम है।

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विमान ने सामान्य प्रशिक्षण उड़ान जारी रखी, लेकिन शाम 7 बजकर 42 मिनट पर नियंत्रण कक्ष से उसका अंतिम संपर्क दर्ज किया गया। इसके तुरंत बाद ही राडार से विमान का संपर्क टूट गया, जिससे आपातकालीन स्थिति का संकेत मिला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राडार संपर्क टूटने के तुरंत बाद, वायुसेना ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया। विमान के संभावित उड़ान मार्ग के आधार पर, खोज दलों को कार्बी आंगलोंग जिले के पहाड़ी और घने वन क्षेत्र में भेजा गया। यह इलाका अपनी दुर्गम पहाड़ियों और सघन जंगलों के कारण खोज अभियान के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, बोखाजन उपविभाग के आसपास के निवासियों ने रात में एक तेज धमाके की आवाज सुनी थी, जिसने विमान दुर्घटना की आशंका को और पुख्ता कर दिया।

दुर्गम इलाकों में चला राहत और बचाव अभियान

बचाव दल को रात भर कठिन पहाड़ी रास्तों से पैदल चलकर खोज अभियान चलाना पड़ा। शुक्रवार तड़के लगभग एक बजे के आसपास, दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा आखिरकार घने जंगलों के बीच खोज लिया गया। मलबे के पास ही दोनों बहादुर पायलटों के पार्थिव शरीर भी मिले, जिनकी पहचान स्क्वॉड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर के रूप में हुई। भारतीय वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस दुर्घटना में दोनों पायलटों को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने अपने प्राण गंवा दिए। वायुसेना के सभी अधिकारी और जवान इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवारों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं और दिवंगत पायलटों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। दुर्घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और वायुसेना ने हादसे की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों या किसी अन्य कारण से हुई। इस तरह की वायु सेना दुर्घटनाएं हमेशा गंभीर जांच की मांग करती हैं।

भारत की वायुशक्ति का आधार: सुखोई तीस एमकेआई

सुखोई तीस एमकेआई भारतीय वायुसेना का सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली युद्धक विमान है। यह एक लंबी दूरी तक मार करने वाला बहु भूमिका युद्धक विमान है, जिसे रूस की सुखोई कंपनी ने विकसित किया है और भारत में हिंदुस्तान वैमानिकी लिमिटेड (HAL) द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित किया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वर्तमान में, वायुसेना के बेड़े में ऐसे 260 से अधिक विमान शामिल हैं और इन्हें भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता की रीढ़ माना जाता है। यह विमान भारत की रक्षा तैयारियों का एक अभिन्न अंग है।

इस दुर्घटना ने एक बार फिर प्रशिक्षण अभियानों के दौरान सुरक्षा के सवालों को सामने ला दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भी इस प्रकार की घटनाएं सामने आई हैं। साल 2023 में ग्वालियर के पास एक सुखोई विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जबकि साल 2024 में महाराष्ट्र के नासिक जिले में भी एक सुखोई विमान हादसे का शिकार हुआ था। अब असम में हुई यह घटना सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी रखरखाव की समीक्षा की आवश्यकता पर बल देती है।

यह भी पढ़ें:  CM नीतीश कुमार का 'Nitish Kumar Rajya Sabha' दांव: क्या है JDU MLA सरयू राय की 'शेल्टर' वाली टिप्पणी का मतलब?

सामरिक महत्व और सैन्य क्षमता पर असर

सामरिक दृष्टि से यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की सुरक्षा व्यवस्था में अत्यंत अहम भूमिका निभाते हैं। यह इलाका चीन और म्यांमार की सीमाओं के निकट है और यहां से वायुसेना पूर्वी सीमा की निगरानी और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है। जोरहाट जैसे अग्रिम वायु अड्डे से संचालित युद्धक विमान सीमावर्ती क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने और किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ऐसे में प्रशिक्षण अभियान भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके माध्यम से पायलट कठिन परिस्थितियों में युद्धक विमानों के संचालन का अभ्यास करते हैं। बहरहाल, इस दुर्घटना में दो अनुभवी पायलटों की शहादत भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी और अपूरणीय क्षति है। उनकी बहादुरी और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

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